Tuesday, 4 August 2020

सबको देना सीखें





INTRODUCTION 

बच्चों जहां जिसे हमसे कुछ भी चाहिए तो हमें उन्हें देना चाहिए ।रिसर्च  बताती हैं कि जब हम किसी की मदद करते हैं तो हमारी खुशी तो बढ़ती ही है साथ-साथ  हमारी हैल्थ भी यानि सेहत भी अच्छी होती है और हमारा मूड भी अच्छा होता है। यह जरूरी नहीं कि आप किसी को कुछ सामान देकर या पैसे देकर ही मदद करें ।मदद करने की सोचें तो फिर आप किसी की भी मदद कैसे भी कर सकते हो। रोहन जानता था।रोहन एक छोटा बच्चा पाँचवी कक्षा  का बच्चा ।वो जब स्कूल के लिए निकला तो बारिश के दिनों में सड़कों पर थोड़ा पानी भर जाता है तो उसके घर और स्कूल के रास्ते में भी बारिश के कारण थोड़ा पानी भर गया। सारे लोग थोड़ा सा कूदकर उस पानी को पार करके आगे जा रहे थे। रोहन भी ऐसा ही कर रहा था लेकिन तभी रोहन ने देखा की एक बूढ़े अंकल भी कूदकर पानी पार करने की कोशिश कर रहे थे पर नहीं कर पा रहे थे ।तब रोहन ने कहा कि रुकिये अंकल। रोहन ने दाएं बाएं देखा और उसे सड़क के किनारे दो ईट नजर  आए उसने फटाफट दोनों ईट उठा  कर पानी के बीचो बीच रख दिया। फिर उस बुढ़े  अंकल को कहां आप आराम से इस पर पैर रखकर सड़क पार करें ।अंकल ने  ऐसा ही किया।तब उन्होंने आराम से और अब बिना कीचड़ में पैर रखकर सड़क के दूसरे किनारे आ गए ।आगे बाकी आने जाने वाले लोग भी ऐसा ही कर रहे थे  यानी ईट ऊपर पैर रखकर सड़क पार कर रहे थे। रोहन के इतने से काम के कारण सबको बहुत आसानी हुई ।किसी को भी कीचड़ में पैर रखकर रास्ता नहीं पार  करना था  या फिर कूदकर सड़क पार नहीं करनी थी। सभी आने जाने वाले ईटों के ऊपर पैर रखकर आगे बढ़ रहे थे ।देखा बच्चों रोहन ने सिर्फ थोड़ी सी समझदारी दिखाई और उस बूढ़े अंकल के बारे में सोचा तो  बाकी लोगों की भी  कितन  मदद हुई ।ऐसे ही हम अलग-अलग तरीकों से अलग-अलग रूप से सबकी मदद कर सकते हैं ।अगर आपका कोई दोस्त आपको कहता है कि मुझे तुमसे बात करनी है एक प्रॉब्लम है। आप भले प्रॉब्लम का सलूशन ना निकाल पाए पर वह आपके पास आया है तो आप उसकी सारी बातें सुन तो  सकते हैं। आप उसे अपना समय दे इसकी पूरी बात सुने ।तो भी उसकी मदद  है। उसे बहुत खुशी मिलती है ।आप बताएं बच्चों जीवो की मदद भी कर सकते हैं आप बस उन जीवो को कोई तकलीफ ना दे ।कुछ बच्चे मस्ती में सड़क के कंकड़ पत्थर उठाकर जानवरों पर फेंक कर मारते हैं जो बिल्कुल भी सही नहीं है आप उनके साथ अच्छा व्यवहार करें आपका अच्छा व्यवहार ही उनकी मदत है ।ऐसे ही आप पर्यावरण का भी ध्यान रखकर सबके लिए अच्छा काम कर सकते हैं पेड़ पौधों को कभी भी नुकसान नहीं पहुंचाना है ।यह भी उनके लिए एक मदद है आप जानवरों को कुछ खिला दे परिंदों के लिए दाना रखें पौधों को पानी दे फिर देखो आपको कितना सुकून मिलता है ।मदद का बहुत अलग-अलग रूप है कैसे जानते हैं हम अगली कहानी में कि हम किसी को अपनी बारी देकर भी उसकी मदद कर सकते हैंह
    
 Story 
              
 एक था बादशाह और उस बादशाह का था एक बेटा यानी कि राजकुमार राजा ने यह मन में सोचा था की जब उसका बेटा अच्छे से पूरे पढ़ाई कर लेगा यानी गुरुकुल से शिक्षा पूरी करके आएगा तब मैं अपने राज्य के हर जरूरतमंद की जरूरत पूरी करूंगा ।फिर एक दिन वह आया जब राजा बहुत खुश थे क्योंकि उनका बेटा पूरी शिक्षा लेकर राज्य में वापस आया था जिसकी खुशी में उस बादशाह ने ऐलान करवाया यानी की घोषणा करवाई अगले दिन से उसके राज्य में हर जरूरतमंदों की हर जरूरत पूरी की जाएगी पूरा राज्य में ढिंढोरा पिटवा या गया  कि जिसको जो कुछ भी चाहिए कल राज महल में आकर बता दे। उस राज्य के लोग तो बहुत खुश हो गए क्योंकि बच्चों हर व्यक्ति कभी ना कभी कोई ना कोई जरूरत होती ही है ।आर जब पता चले कि हमारी जरूरत पूरी होने वाली है तो खुशी तो होगी ही ।सब लोग अगले दिन का इंतजार करने लगे सोचने लगे कि हम राजा से यह कहेंगे। इस जरूरत को पूरा करने की मांग करेंगे। अगले दिन बादशाह के राज महल के बाहर बहुत लंबी लाइन लग गई बहुत सारी लोगों की भीड़ जमा हो गई मानो पूरा राज्य ही एक कतार में खड़ा था। उस लाइन में सबसे पीछे आदमी खड़ा था तभी उस आदमी के पीछे एक और आदमी आया उसने अपनी जगह उसे दे दी अब खुद सबसे पीछे हो गया भूत दिन भर ऐसा ही करता रहा जो कोई भी आता उसे अपनी जगह दे देते उधर राजा बारी बारी से सबकी जरूरतें पूरी करते जा रहे थे किसी ने कहा कि मुझे खेतों में पानी चाहिए ।किसी ने कहा कि मुझे अपना पक्का घर बनवाना है ।किसी ने कहा कि मेरे घर में बेटी की शादी करनी है उसमें आप मदद कर दीजिए। तो किसी ने कहा शाही वैद्य से मेरे बेटे का इलाज करवा दीजिए। जिस जिस को जो जो भी जरूरत थी सब ने बादशाह से  कहा और बादशाह ने उनकी जरूरतें भी पूरी की । सब लोग बादशाह की तारीफ  के साथ साथ उस व्यक्ति की भी तारीफ करते जा रहे थे जो सबको अपनी बारी देता जा रहा था ।यह बात बादशाह के कानों तक भी पहुंच गई पूरा दिन निकल गया और लोग अपनी जरूरत के हिसाब से वहां से लेते गए और चलते गए ।बहुत खुश थे कि आज हमको वह मिल गया जिसकी हमें जरूरत थी। पर उन अंकल को तो कोई फर्क ही नहीं पड़ता था। कि लोग अपनी जरूरत पूरी करते जा रहे हैं और वह सबसे पीछे ही है ।बादशाह को जब यह बात पता चली उन्होंने उस व्यक्ति को राजमहल के अंदर बुलवाया उससे कहा कि भाई आपका नंबर तो कब का आ जाता और आप जो मांगते वह पूरी करके अब तक घर भी चले जाते तुम ही क्या कर रहे हो और ऐसा क्यों कर रहे हो ? तुम सुबह से पीछे खड़े लोगों को आगे आकर अपनी जगह देते जा रहे हो और खुद अभी तक पीछे खड़े हो ।व्यक्ति ने जवाब दिया बादशाह जो आप कर रहे हैं मैं उतना तो नहीं कर सकता पर मैं भी कुछ देने की इच्छा रखता हूं क्योंकि असली मजा तो देने में है ।आपके पास देने के लिए लोगों को शाही खजाना है पर मेरे पास लोगों को देने के लिए मेरी बारी ही है ।मैं हर बार  अपनी बारी किसी और को दे देता हूं मुझे भी थोड़ा सुकून मिलता है ।बादशाह उसकी इस बात से बहुत प्रभावित हुआ और वह सोच रहे थे अगर देने का गुण हो तो कुछ ना होते हुए भी हम बहुत कुछ दे सकते हैं ।मेरे पास तो देने के लिए बहुत कुछ है इसके पास तो कुछ भी नहीं था फिर भी इसके कारण लोगों की मांग थोड़ी जल्दी पूरी हुई। बादशाह ने उसी वक्त उसे अपने राज महल में अच्छा सा पद देकर उसे काम पर रख लिया ।तो देखा बच्चों हम सभी के पास दूसरों को देने के लिए कुछ ना कुछ होता ही है बस देने का गुण होना चाहिए। हमें देना सीखना चाहिए।
                                  🙏धन्यवाद 🙏


असली मजा तो देने में है।
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बांटने से ही बढ़ती हैं खुशियां। 

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