Tuesday, 4 August 2020

सबको देना सीखें





INTRODUCTION 

बच्चों जहां जिसे हमसे कुछ भी चाहिए तो हमें उन्हें देना चाहिए ।रिसर्च  बताती हैं कि जब हम किसी की मदद करते हैं तो हमारी खुशी तो बढ़ती ही है साथ-साथ  हमारी हैल्थ भी यानि सेहत भी अच्छी होती है और हमारा मूड भी अच्छा होता है। यह जरूरी नहीं कि आप किसी को कुछ सामान देकर या पैसे देकर ही मदद करें ।मदद करने की सोचें तो फिर आप किसी की भी मदद कैसे भी कर सकते हो। रोहन जानता था।रोहन एक छोटा बच्चा पाँचवी कक्षा  का बच्चा ।वो जब स्कूल के लिए निकला तो बारिश के दिनों में सड़कों पर थोड़ा पानी भर जाता है तो उसके घर और स्कूल के रास्ते में भी बारिश के कारण थोड़ा पानी भर गया। सारे लोग थोड़ा सा कूदकर उस पानी को पार करके आगे जा रहे थे। रोहन भी ऐसा ही कर रहा था लेकिन तभी रोहन ने देखा की एक बूढ़े अंकल भी कूदकर पानी पार करने की कोशिश कर रहे थे पर नहीं कर पा रहे थे ।तब रोहन ने कहा कि रुकिये अंकल। रोहन ने दाएं बाएं देखा और उसे सड़क के किनारे दो ईट नजर  आए उसने फटाफट दोनों ईट उठा  कर पानी के बीचो बीच रख दिया। फिर उस बुढ़े  अंकल को कहां आप आराम से इस पर पैर रखकर सड़क पार करें ।अंकल ने  ऐसा ही किया।तब उन्होंने आराम से और अब बिना कीचड़ में पैर रखकर सड़क के दूसरे किनारे आ गए ।आगे बाकी आने जाने वाले लोग भी ऐसा ही कर रहे थे  यानी ईट ऊपर पैर रखकर सड़क पार कर रहे थे। रोहन के इतने से काम के कारण सबको बहुत आसानी हुई ।किसी को भी कीचड़ में पैर रखकर रास्ता नहीं पार  करना था  या फिर कूदकर सड़क पार नहीं करनी थी। सभी आने जाने वाले ईटों के ऊपर पैर रखकर आगे बढ़ रहे थे ।देखा बच्चों रोहन ने सिर्फ थोड़ी सी समझदारी दिखाई और उस बूढ़े अंकल के बारे में सोचा तो  बाकी लोगों की भी  कितन  मदद हुई ।ऐसे ही हम अलग-अलग तरीकों से अलग-अलग रूप से सबकी मदद कर सकते हैं ।अगर आपका कोई दोस्त आपको कहता है कि मुझे तुमसे बात करनी है एक प्रॉब्लम है। आप भले प्रॉब्लम का सलूशन ना निकाल पाए पर वह आपके पास आया है तो आप उसकी सारी बातें सुन तो  सकते हैं। आप उसे अपना समय दे इसकी पूरी बात सुने ।तो भी उसकी मदद  है। उसे बहुत खुशी मिलती है ।आप बताएं बच्चों जीवो की मदद भी कर सकते हैं आप बस उन जीवो को कोई तकलीफ ना दे ।कुछ बच्चे मस्ती में सड़क के कंकड़ पत्थर उठाकर जानवरों पर फेंक कर मारते हैं जो बिल्कुल भी सही नहीं है आप उनके साथ अच्छा व्यवहार करें आपका अच्छा व्यवहार ही उनकी मदत है ।ऐसे ही आप पर्यावरण का भी ध्यान रखकर सबके लिए अच्छा काम कर सकते हैं पेड़ पौधों को कभी भी नुकसान नहीं पहुंचाना है ।यह भी उनके लिए एक मदद है आप जानवरों को कुछ खिला दे परिंदों के लिए दाना रखें पौधों को पानी दे फिर देखो आपको कितना सुकून मिलता है ।मदद का बहुत अलग-अलग रूप है कैसे जानते हैं हम अगली कहानी में कि हम किसी को अपनी बारी देकर भी उसकी मदद कर सकते हैंह
    
 Story 
              
 एक था बादशाह और उस बादशाह का था एक बेटा यानी कि राजकुमार राजा ने यह मन में सोचा था की जब उसका बेटा अच्छे से पूरे पढ़ाई कर लेगा यानी गुरुकुल से शिक्षा पूरी करके आएगा तब मैं अपने राज्य के हर जरूरतमंद की जरूरत पूरी करूंगा ।फिर एक दिन वह आया जब राजा बहुत खुश थे क्योंकि उनका बेटा पूरी शिक्षा लेकर राज्य में वापस आया था जिसकी खुशी में उस बादशाह ने ऐलान करवाया यानी की घोषणा करवाई अगले दिन से उसके राज्य में हर जरूरतमंदों की हर जरूरत पूरी की जाएगी पूरा राज्य में ढिंढोरा पिटवा या गया  कि जिसको जो कुछ भी चाहिए कल राज महल में आकर बता दे। उस राज्य के लोग तो बहुत खुश हो गए क्योंकि बच्चों हर व्यक्ति कभी ना कभी कोई ना कोई जरूरत होती ही है ।आर जब पता चले कि हमारी जरूरत पूरी होने वाली है तो खुशी तो होगी ही ।सब लोग अगले दिन का इंतजार करने लगे सोचने लगे कि हम राजा से यह कहेंगे। इस जरूरत को पूरा करने की मांग करेंगे। अगले दिन बादशाह के राज महल के बाहर बहुत लंबी लाइन लग गई बहुत सारी लोगों की भीड़ जमा हो गई मानो पूरा राज्य ही एक कतार में खड़ा था। उस लाइन में सबसे पीछे आदमी खड़ा था तभी उस आदमी के पीछे एक और आदमी आया उसने अपनी जगह उसे दे दी अब खुद सबसे पीछे हो गया भूत दिन भर ऐसा ही करता रहा जो कोई भी आता उसे अपनी जगह दे देते उधर राजा बारी बारी से सबकी जरूरतें पूरी करते जा रहे थे किसी ने कहा कि मुझे खेतों में पानी चाहिए ।किसी ने कहा कि मुझे अपना पक्का घर बनवाना है ।किसी ने कहा कि मेरे घर में बेटी की शादी करनी है उसमें आप मदद कर दीजिए। तो किसी ने कहा शाही वैद्य से मेरे बेटे का इलाज करवा दीजिए। जिस जिस को जो जो भी जरूरत थी सब ने बादशाह से  कहा और बादशाह ने उनकी जरूरतें भी पूरी की । सब लोग बादशाह की तारीफ  के साथ साथ उस व्यक्ति की भी तारीफ करते जा रहे थे जो सबको अपनी बारी देता जा रहा था ।यह बात बादशाह के कानों तक भी पहुंच गई पूरा दिन निकल गया और लोग अपनी जरूरत के हिसाब से वहां से लेते गए और चलते गए ।बहुत खुश थे कि आज हमको वह मिल गया जिसकी हमें जरूरत थी। पर उन अंकल को तो कोई फर्क ही नहीं पड़ता था। कि लोग अपनी जरूरत पूरी करते जा रहे हैं और वह सबसे पीछे ही है ।बादशाह को जब यह बात पता चली उन्होंने उस व्यक्ति को राजमहल के अंदर बुलवाया उससे कहा कि भाई आपका नंबर तो कब का आ जाता और आप जो मांगते वह पूरी करके अब तक घर भी चले जाते तुम ही क्या कर रहे हो और ऐसा क्यों कर रहे हो ? तुम सुबह से पीछे खड़े लोगों को आगे आकर अपनी जगह देते जा रहे हो और खुद अभी तक पीछे खड़े हो ।व्यक्ति ने जवाब दिया बादशाह जो आप कर रहे हैं मैं उतना तो नहीं कर सकता पर मैं भी कुछ देने की इच्छा रखता हूं क्योंकि असली मजा तो देने में है ।आपके पास देने के लिए लोगों को शाही खजाना है पर मेरे पास लोगों को देने के लिए मेरी बारी ही है ।मैं हर बार  अपनी बारी किसी और को दे देता हूं मुझे भी थोड़ा सुकून मिलता है ।बादशाह उसकी इस बात से बहुत प्रभावित हुआ और वह सोच रहे थे अगर देने का गुण हो तो कुछ ना होते हुए भी हम बहुत कुछ दे सकते हैं ।मेरे पास तो देने के लिए बहुत कुछ है इसके पास तो कुछ भी नहीं था फिर भी इसके कारण लोगों की मांग थोड़ी जल्दी पूरी हुई। बादशाह ने उसी वक्त उसे अपने राज महल में अच्छा सा पद देकर उसे काम पर रख लिया ।तो देखा बच्चों हम सभी के पास दूसरों को देने के लिए कुछ ना कुछ होता ही है बस देने का गुण होना चाहिए। हमें देना सीखना चाहिए।
                                  🙏धन्यवाद 🙏


असली मजा तो देने में है।
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बांटने से ही बढ़ती हैं खुशियां। 

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Tuesday, 21 July 2020

मिलेगा सही रास्ता और मिलेंगी खुशियां अपार।



INTRODUCTION ..........

बच्चों हम सब जिस क्लास में पढ़ते हैं उस क्लास का कोई न कोई मॉनिटर तो होता ही है ।मॉनिटर वही ना जो क्लास में जब तक एक पीरियड के बाद दूसरी  टीचर क्लास में नहीं आती तब तक क्लास को देखता है। तो हमारी टीचर क्लास में किस बच्चे को मॉनिटर बनाती है उसी बच्चे को ना जिसमें लीडरशिप की क्वालिटी हो जो क्लास को संभाल सकता हो। और टीचर बखूबी यह काम करती है कि कौन सा स्टूडेंट   ऐसा कर सकता है ।जिसमें लीडरशिप की क्वालिटी होती है टीचर उसे ही क्लास का मॉनिटर चुनती है ।ऐसे ही बच्चों हर काम के 2 तरीके होते हैं ।एक तो सोच समझकर सही चुनाव किया जाए ताकि आगे कोई समस्या ही ना हो ।दूसरा जल्दबाजी में कुछ भी करना इससे थोड़े समय के लिए काम आसान हो सकता है लेकिन फिर से हमें वही काम करना पड़ सकता है । जैसे एक  गार्डन  जिसमें बहुत सारी घास लगी हुई है और हमें वह घास साफ करनी है तो उसे साफ करने के लिए हमारे पास दो तरीके हैं ।पहला तरीका बहुत आसान है दूसरा तरीका थोड़ा मुश्किल है लेकिन वह तरीका ज्यादा समय तक रिजल्ट देता है अच्छे नतीजे देता है। पहले तरीके में हम घास को मशीन से साफ कर सकते हैं लेकिन इस तरीके से घास जड़ से नहीं निकलेगी ऊपर से कटेगी और कुछ टाइम के बाद घास फिर आएगी। दूसरा तरीका है आराम से झुक कर बैठ कर हाथ से  घास को जड़ से निकालना थोड़ी मेहनत का काम है लेकिन ऐसा करने से वह घास जङ से निकल आएगी और काफी समय तक नहीं निकलेगी। पहला तरीका आसान है जड़ से खत्म नहीं हुई लेकिन दूसरा तरीका थोड़ा मेहनत वाला लेकिन समस्या जैसे खत्म हो जाएगी। तो बताओ बच्चों हमें घास की सफाई के लिए कौन सा तरीका अपनाना चाहिए ?बिल्कुल सही- दूसरा तरीका- यही सही चुनाव है। राइट सिलेक्शन बच्चों हमें भी सिर्फ चीजों को बाहर से नहीं देखना है बल्कि अंदर तक उसकी जांच परख करके हमें चुनाव करना चाहिए। हमारे जीवन में सही चुनाव का बहुत महत्व है क्योंकि अगर सही दिशा है तो हमारी दशा भी सही होगी। यानी हमारा  तो  भला ही भला होगा। लेकिन कई बार अगर हमारा चुनाव सही नहीं होता तो हमें काफी कड़वे अनुभव भी हो सकते हैं यानी जो परिणाम हमको मिलेगा हमारे गलत चुनाव के कारण उससे हमें खुशी नहीं मिलेगी ना ही हमारा काम बनेगा ।इसलिए हमें जब भी चुनाव करना है सोच समझ कर करना है चाहे वह चुनाव फ्रेंड्स बनाने के लिए हो या फिर चीजों के लिए हो फैसला लेने में या किसी का भी चुनाव करने के लिए हमें जल्दबाजी नहीं करनी है बिना सोचे समझे चुनाव करने के बाद हमें पछताना भी पड़ सकता है कैसे जानते हैं अपनी अगली कहानी में
   

   Story


बच्चों आप सब ने भी राजा रानी की कहानियां सुनी होगी। राजकुमार कौन होता है? बच्चों और राजा के बेटे  हम राजकुमार कहते हैं और राजा की बेटी होती है उसे राजकुमारी ।तो आज हम आपको सुनाएंगे राजकुमार अनिरुद्ध की कहानी जिसे घोड़ों का शौक था और उनका सबसे प्यारा घोड़ा था सुल्तान ।सुल्तान राजकुमार का सबसे प्यारा घोड़ा था राजकुमार जहां भी जाते वहां सुल्तान के साथ ही जाते थे। सुल्तान बहुत ही सुंदर घोड़ा एकदम काला और काली लंबी-लंबी उसकी पूंछ। वह इतना तेज दौड़ता था मानो हवा से बातें कर रहा हो।
राजकुमार ने अभी तक बहुत सारी रेस सुल्तान के साथ जीती थी जब भी घोड़ों की रेस होती है थी तो वह सुल्तान के साथ ही उस रेस में हिस्सा लेते थे। अब तक सारी रेस  उन्होंने  सुल्तान के साथ जीती है इसलिए उन्हें सुल्तान पर बहुत गर्व था ।राजकुमार ने सुल्तान को कभी किसी तरह का  दबाव  नहीं दिया था। सुल्तान को अपने बच्चे की तरह प्यार करते थे ।उसका बहुत ध्यान रखते थे। जब वह सुल्तान पर सवारी करते तो इस बात का ध्यान रखते की सुल्तान आसानी से दौड़ पा रहा है कि नहीं सुल्तान थका हुआ तो नहीं है ।राजकुमार अपनी खुद की सवारी के लिए मशहूर थे उन्हें कोई भी घोड़ा मिल जाए वह उसको अपना फ्रेंड बना ही लेते थे। उसके साथ अपना तालमेल बना ही लेते थे क्योंकि जानवरों के लिए उनके मन में बहुत प्यार और दया की भावना थी। किसी भी घोड़े को वह अपनी तरफ खींच लेते थे लेकिन सुल्तान के बाद उन्होंने किसी और घोड़े की तरफ देखा ही नहीं था। एक बार राजकुमार अनिरुद्ध एक दौड़ में शामिल होने के लिए जा रहे थे तब उनके पड़ोस के राज्य के राजकुमार अनिकेत ने उनको एक इनविटेशन यानी आमंत्रण भेजा और कहा आप हमारे राज्य से होकर जा रहे हैं तो क्यों ना एक दिन आप हमें अपनी सेवा का मौका दें ।और फिर हम सब साथ में दौड़ में शामिल होने के लिए साथ में चलेंगे राजकुमार अनिकेत का दोस्ती भरा इनविटेशन पाकर राजकुमार अनिरुद्ध ने उनका निमंत्रण मान लिया और राजकुमार 1 दिन पहले अपने महल से निकलकर जैसे ही राजकुमार अनधिकृत के  महल के पास पहुंचे तो उन्होंने ने देखा की राजकुमार अनिकेत ने उनके स्वागत के लिए बहुत सारी तैयारी  की है। वह खुद भी उनके स्वागत के लिए खड़े थे। जब दोनो राजकुमार मिले तो राजकुमार अनिकेत ने कहा हमारा निमंत्रण पर आने के लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद कहते हुए उन्होंने राजकुमार अनिरुद्ध को अपने गले से लगा लिया। और फिर उनके साथ उन्होंने उसका घोड़ा देखा उन्होंने कहा अरे वाह कितना शानदार घोड़ा है आपके पास ।बताओ बच्चों राजकुमार अनिरुद्ध के घोड़े का क्या नाम था ?बिल्कुल सही -सुल्तान
  अनिकेत ने कहा इस घोड़े के साथ तो आपकी जीत पक्की है ।राजकुमार अनिरुद्ध आपका सुल्तान तो बहुत फेमस है सब लोग जानते हैं आपके और आपके घोड़े के बारे में और आज तो अपनी आंखों से इसे देख भी लिया भाई वाह वाकई बहुत ही खूबसूरत और शानदार घोड़ा है आपका। राजकुमार अनिरुद्ध भी अपने घोड़े सुल्तान की तारीफ सुनकर बहुत खुश हुए फिर राजकुमार अनीकेत उनको महल के अंदर लेकर गए और जब सिपाही राजकुमार के घोड़े को अस्तबल की ओर ले जाने लगे ।
बच्चों अस्तबल पता है क्या होता है जिस जगह पर घोड़ों को रखा जाता है उस जगह को अस्तबल कहते हैं। जब सैनिक सुल्तान को अस्तबल ले जाने लगे तभी राजकुमार अनिकेत ने कहा कि सुल्तान का बहुत ध्यान रखना और अलग शाही ठाट बाट से रखना ऐसे सुल्तान का बहुत ध्यान रखना यह सुनकर तो सुल्तान के कान खड़े हो गए सुल्तान को बहुत अच्छा लग रहा था खुद की तारीफ सुनकर शाही स्वागत और शाही ठाठ बाट इतना मान सम्मान यह सब देखकर तो बहुत खुश हो गया बच्चों पशु पक्षी बोल नहीं सकते लेकिन उनकी भी भावनाएं होती है फिर रात को दोनों राजकुमारों ने मिलकर खाना खाया। राजकुमार अनिरुद्ध और अनिकेत में रात का खाना खाने के बाद जब राजकुमार अनिरुद्ध सोने के लिए चले गए तो राजकुमार अनिकेत वह अपने कमरे में सोने नहीं गए वह गए अनिरुद्ध के घोड़े सुल्तान के पास। उन्होंने सुल्तान से पूछा क्यों सुल्तान कैसा लग रहा है ?यहां पर कोई कमी तो नहीं लग रही सुल्तान तो बड़े मजे में था उसने सिर हिलाकर अनिकेत को हर चीज के लिए धन्यवाद दिया। फिर राजकुमार ने आगे कहा सुल्तान अगर तुम कल की रेस में मेरा साथ दोगे मेरा चुनाव करोगे तो जीवन भर ऐसे ही शाही ठाट बाट में मिलेंगे अब फैसला तुम्हारे हाथ में है ।सोच लो कल तुम्हारा एक सही चुनाव तुम्हारी जिंदगी बदल देगा ।ऐसा कहकर राजकुमार अनीकेत  वहां से चले गए ।
राजकुमार अनिकेत की बातें बार-बार सुल्तान के कानों में गूंज रही थी सवेरे जब सभी लोग दौड़ में जाने के लिए तैयार हुए राजकुमार के घोड़ों को भी लाया गया जब राजकुमार अनिरुद्ध अपने घोड़े सुल्तान की तरफ बढ़े तो यह क्या सुल्तान जोर जोर से हिन हिना ने लगा ।राजकुमार अनिरुद्ध कुछ समझ पाते इसके पहले ही सुल्तान ने अपना चुनाव कर लिया था वह राजकुमार अंनिकेत के पास जाकर खड़ा हो गया। राजकुमार अनिरुद्ध ने बहुत कोशिश की कि उसके साथ घोड़ा आगे बढ़े लेकिन सुल्तान तो हिला ही नहीं ।यह देख कर राजकुमार अनिरुद्ध की आंखों में आंसू आ गए क्योंकि उन्होंने सुल्तान को अपने बच्चे की तरह पाला था उन्हें लग रहा था कि आज कहीं मैंने अपने बच्चों को तो नहीं खो दिया फिर क्या था। सुल्तान और अनिकेत दौड़ के लिए निकल पड़े पता है बच्चों इस पूरी घटना में परेशान केवल राजकुमार अनिरुद्ध नहीं थे बल्कि एक और घोड़ा भी परेशान था जिसका नाम था शालीमार जो कि राजकुमार अनिकेत के घोड़े का नाम था। और शालीमार ने पूरे जीवन राजकुमार अनिकेत की सेवा की थी। और कई दौड  जीती थी और कई बार तो उन्हें चोट लगने से भी बचाया था। लेकिन सुल्तान को पाने की चाहत में राजकुमार अनिकेत ने तो अपने पहले पुराने प्यारे घोड़े शालीमार को पलट कर भी नहीं देखा। राजकुमार अनिरुद्ध और शालीमार दोनों अकेले खड़े थे ।तभी शालीमार को राजकुमार अनिरुद्ध  प्यार से हाथ फेरते हुए  बड़े प्यार से देख रहे थे शालीमार भी राजकुमार अनिरुद्ध को बड़े प्यार से देखने लगा। तब राजकुमार अनिरुद्ध ने सोचा कि भले ही तेज रफ्तार वाला घोड़ा नहीं है लेकिन अगर मैं इसके ऊपर भी सवारी करके दौड़ में जाऊं तो शायद इसे भी अच्छा लगेगा ।नहीं तो यह भी अकेला उदास खड़ा होगा और राजकुमार अनिरुद्ध तो वैसे भी सभी जानवरों को बड़े प्यार से अपना तालमेल बैठा लेते थे । फिर राजकुमार अनिरुद्ध ने बड़े प्यार से शालीमार को गौर से देखा और उसके सिर पर हाथ से में लगे और सहलाने लगे फिर राजकुमार ने शालीमार से कहा चलो शालीमार आज मेरी और तुम्हारी दोनों की सबसे बड़ी  दौड़ होगी ।यह दौड़ सवारों की दौड़ नहीं बल्कि सही चुनाव की दौड़ होगी जिंदगी में एक सही चुनाव की दौड़ ऐसा कहकर राजकुमार अनिरुद्ध शालीमार पर सवार हो गए ।फिर क्या शालीमार भी पूरे जोश में हवा को चीरते हुए आगे बढ़ गए राजकुमार अनिरुद्ध और शालीमार भी जल्दी से दौड़ वाली जगह पर पहुंच गए ।जहां पर सुल्तान किसके साथ खड़ा था बच्चों ?      बिल्कुल सही राजकुमार अनिकेत के साथ और राजकुमार अनिकेत का घोड़ा  शालीमार वह खड़ा था राजकुमार अनिरुद्ध के साथ यानी दोनों राजकुमार के घोड़े एक दूसरे के साथ खड़े थे ।क्योंकि सुल्तान ने अपने राजकुमार को छोड़कर दूसरे राज्य के राजकुमार अनिकेत का चुनाव किया था। थोड़ी देर में रेस दौड़ शुरू होने वाली थी ।राजकुमार अनिकेत सुल्तान को लेकर राजकुमार अनिरुद्ध के पास है और कहा मेरे दोस्त मेरे मित्र मुझे आज तुम्हारे लिए अच्छा नहीं लग रहा है-  कहां पर सुल्तान और कहां पर शालीमार दोनों का कोई मुकाबला नहीं है तब राजकुमार अनिरुद्ध ने जवाब दिया दोस्त तुमने बिल्कुल सही कहा सुल्तान और शालीमार का कोई मुकाबला नहीं है सुल्तान ने आखिरी वक्त पर मेरा साथ छोड़ दिया जबकि मैंने इसे बड़े प्यार से रखा था लेकिन शालीमार ने जरूरत के वक्त मेरा साथ दिया ।तो सुल्तान की नजरें झुक गई यह  सुनकर फिर राजकुमार कुमार अनिकेत ने सुल्तान से कहा सुल्तान तो तुमको  हर बार की तरह इस बार भी जीतना होगा मेरे लिए ।लेकिन राजकुमार अनिरुद्ध ने शालीमार से कहा शालीमार तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं जो होगा अच्छा होगा। जीत भी  हमारी होगी और हार भी हुई वह भी हमारी होगी। फिर जैसे ही ऐलान हुआ की बस दौड़ शुरू होने वाली है  तो 100 से भी ज्यादा घुड़सवार दौड़ के लिए तैयार हो गए ।रेस शुरू हुई । सुल्तान हर बार की तरह फर्स्ट नंबर पर दौड़ रहा था ।और शालीमार तीसरे नंबर पर था जैसे ही दूसरे नंबर वाले घुड़सवार ने सुल्तान से बराबरी की यानी 1 नंबर पर आने लगा तो राजकुमार अनिकेत ने भी सुल्तान की लगाम खींची ताकि वह और तेज दौड़ सके लेकिन ऐसे व्यवहार की सुल्तान को तो बिल्कुल आदत नहीं थी। क्योंकि राजकुमार अनिरुद्ध ने तो बड़े आराम से उनकी सवारी की थी तो तेजी से लगाम खींचने के कारण सुल्तान अपना संतुलन खो बैठा उसका सन्तुलन balance इधर-उधर होने लगा तो इसका असर उसकी रफ्तार पर भी हुआ। उसकी स्पीड स्लो हो गई इसी बीच राजकुमार अनिरुद्ध ने घोड़े शालीमार के साथ सुल्तान की बराबरी कर ली राजकुमार अनिरुद्ध इतने में नॉरमल लेवल पर उसकी लगाम थामने हुए बिना किसी दबाव के शालीमार को दौड़ने की पूरी आजादी के साथ दौड़ रहे थे ।जिसके चलते शालीमार बहुत अच्छी स्पीड पकड़ चुका था उसकी रफ्तार बहुत तेज हो गई थी दोनों हार जीत की सोच से परे थे बस एक दूसरे का साथ देते हुए बिना किसी को देखें आगे बढ़ते जा रहे थे एक दूसरे पर विश्वास करते हुए। अपने चुनाव पर भरोसा करते हुए तो बताओ बच्चों इस दौड़ का क्या रिजल्ट हुआ होगा ?राजकुमार अनिरुद्ध और शालीमार ने तो पूरा पासा ही पलट दिया वहीं दूसरी ओर सुल्तान गलत हाथ में लगाम जाने की वजह से बहुत पछता रहा था  ।   पहली बार सुल्तान ने कोई दौड़ नहीं जीती थी। एक गलत चुनाव के कारण पिता की तरह प्यार करने वाले राजकुमार अनिरुद्ध को भी उन्होंने खो दिया था ।और दूसरी तरफ शालीमार ने सही मालिक का चुनाव किया उसे एक नेक दिल  जानवरों से प्यार करने वाले मालिक को पाया ।उसके जीवन को एक नई दिशा मिली तो थोड़ी सी लालच के कारण उसने गलत का साथ दिया।
 कुछ भी चुनते समय यदि सोचेंगे समझेंगे करेंगे विचार तो मिलेगा सही रास्ता और मिलेंगी खुशियां अपार।

                                   🙏  धन्यवाद 🙏


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Wednesday, 8 July 2020

अपने लक्ष्य पर रखिए पहली नजर ।


बच्चों सब की यही इच्छा होती है कि कोई भी काम किया जाए उसमें सफलता हासिल हो। इतिहास में लोंगों को उनकी स्रफलता और उपलब्धियों के कारण याद किया जाता है। एक बार एक क्रामयाब व्यक्ति
का इंटरव्यू चल रहा था, काफी सारे पत्रकार उनको घेरकर उनसे सवात्र पूछ रहे थे। एक पत्रकार ने उनसे
सवाल किया सर॒ आप इतने सफल रहे हर क्षेत्र में आप की इस सफलता की उड़ान का क्‍या रहस्य हैं ? उन्होंने
 जवाब विया कि सबसे पहले हमें हमारे जीवन के लक्ष्य यानी उद्देश्य के बारे में जानना चाहिए।
अगर आपको अपनी मंजित्र नहीं पता हैं कि हमें कहां जाना हैं तब तक यात्रा नहीं कर सकते। इसलिए
सबसे पहले यह निश्चित करना जरूरी हैं कि हम जीवन में क्या बनना चाहते हैं इसीलिए त्लक्ष्य का होना बहुत जरूरी हैं। यदि जीवन मे कोर्ड हमारा लक्ष्य नहीं है तो यह ऐसा ही है जैसे कोई नाव हो बिना पतवार के।
 ईमानदारी से मेहनत करनी होगी।

सफलता की उडान के लिए किसी को प्रेरणा यानी कि किसी से सीख ल्रेकर जब हम कोई काम करते
है ऑर  प्रसीना चाहिए यानी कड़ी मेहनत। मेहनत ही हमें बच्चो हर काम में सफलता की चोटियों तक
ले जा सकती हैं।.....

जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने के लिए सबसे पहले जरुरी हैं सकारात्मक सोच हर व्यक्ति की अपनी काबिलियत ह्येती हैं और सभी को अपने गुणों के आधार पर ही अपने खुद के लक्ष्य बनाने चाहिए किसी दूसरे को देखकर नहीं। कोर्ई संगीत में अच्छा हो सकता हैं, कोई डांस में, किसी को गणित अच्छी लगती हैं तो किसी को डतिहास।
 जीवन मे आगे बढ़ने के लिए लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए।

अगर आपको दिशा पता हैं कि आपने किस रास्ते से जाना हैं तो मंजिल तक पहुंचना आसान हो जाता हैा  हैं। जैसे बच्चों आपको सवेरे सवेरे स्कूल जाना हैं तो आप जानते हैं कि कौन सा रास्ता आपको स्कूल की ओर ले जाता हैं और आप बिना रास्ता अटके अपनी स्कूल पहुंच जाते हैं। सोचो अगर रास्ता ना प्रता हो तो क्‍या मंजिन तक पहुंच पाएंगे?

जैसे बच्चो  हवा का रुख जिस दिशा में हो उसी दिशा की ओर बनेंगे तो हमारी ऊर्जा कम लगेगी। विपरीत
दिशा में चनेंगे तो वह ज्यादा लगेगी। वैंसे ही हमारा मन जिस काम में ज्यादा लगता हैं या हमारी रुचि
जिसमें ज्यादा होती हैं या जो गुण हमारे अंदर हैं उसके हिसाब से उद्देश्य बनाएंगे तो सफ़लता शीघ्र मिलती
हैं। फ़िर आपको यह जानना हैं कि आपको किस काम को करने में खुशी ज्यादा मिलती हैं। जिस काम को
करने की इ्चच्छा हो, अपनी कार्य क्षमता के साथ उसे पूरा करने के लिए जरुरी हैं। सही लक्ष्य का चुनाव, यही
सफल्रता की उड़ान का पहला कदम हैं।

बच्चों हम बात कर रहे है विक्रम जी की, जो देश के पहने व्यकित हैं जिन्हें पैसों से कार चलाने का लाइसेंस मिला। विक्रम जी छोटे थे उनको अपने दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद भी उन्होंने अपने जीवन में लक्ष्य बनाएं
और उस लक्षय को पाने के लिए उन्होंने बड़ी मेहनत की। उनके प्रिवार मैं उनके माता पिता ने हमेशा सिखाया जिंदगी जो भी दिन दिखाए मुस्कुराते हुए उसका सामना करना चाहिए। पहले विक्रम जी ने लक्ष्य बनाया की वह ज़रूरी काम के किसी पर निर्भर नहीं रहेंगे जैसे खाना प्रीना, पढ़ना लिखना। उनके दोनों
हाथ न होने के बाद भरी उन्होंने करो पैरों से ही पढ़ना लिखना और बाकी काम बढ़त मेहनत से सीखे ऑर अब वह अपने रोजमर्रा के कामो को अपने पैरों से करते हैं ऑर वह॒ किसी पर भी निर्भर नहीं हैं।

हालांकि विक्रम पहले से ही अपने सारे काम खुद से कर लेते थे लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि अपनी
 जरूरतों के निए वह दूसरों पर निर्भर हैं। क्‍योंकि विक्रम जी कॉलेज जाने के लिए खुद से रैडी हो जाते
थे लेकिन उनका दौस्‍त उनको लेने आता था उनको कॉलेज तक साथ  फ़िर कमी किसी कारण
से अगर उनका दौस्त नहीं आ पाता था तौ उनके प्रापा कौ अपना काम छोड़कर विक्रम जी को कॉलेज छोड़ने
जाना पड़्गा था। तब उन्होंने एक और लक्ष्य बनाया कि वह कार चलाना स्रीखेगें ऑर जहां जाना होगा खुद
से कार चला कर जाएंगे।

सुनने में उनका ल्रक्ष्य कितना मुश्किल लगता हैं? बच्चो? कि पैयों से कार चल्राना सीखना। विक्रम जी ने अपना
लक्ष तो बनाया कि वह कार चलाना स़रीखेगे ताकि उनके कारण किसी को परेशानी ना हो। लेकिन मुश्किलवाली बात थी कि उन्हें कार चलाना सिखाए कॉन?  फ़िर विक्रम जी एक ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट  गए। वही
स्कूल जहां कार चलाना स़िखाते है। वहाँ जाकर उन्होंने बोला कि मुझे कार चल्राना सीखना हैं तो आई
कर वहां के सर ने कहा कि आपके दोनों हाथ नहीं है आप कैंसे कार चलाना सीख सकते  हैं ।
विक्रम जी आरटीओ यानी रीजनत्र ट्रांसपोर्ट ऑफ्रिस ग्रए जहाँ से उनको ड्राड़विंग लाईसैंस मिल सके।

जब विक्रम जी आरटीओ ऑफिस गए तो उन्होंने अपने ड्राड़विंग लाईसैंस के ल्रिए प्रार्थना पत्र दिया तो ऑफिस
_वालों  ने उन्हें मना कर दिया कि ऐसा कोर्ड नियम नहीं हैँ जिसके बिना हाथों के पैरों से गाड़ी चलाने वाले कौ
लाइसेंस दिया जाए। वह ऑफिस से वापस आ गए पर उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं बदला।

उन्होंने फ़िर अपने राज्य के मंत्री जी कौ एक पत्र लिखा कि अगर हमारा नारा " सबका साथ सबका विकास"
 तो बिना हाथ  वाले व्यक्ति को ड्रड़विंग लाडसेंस क्यों नहीं मिल सकता। फ़िर विक्रम जी ने ट्रासपॉर्ट
कमिश्नर के आगे पैरों से कार चला कर विखाई। इसके बाद उस राज्य के मंत्री जी ने कहा कि हम आपके
स्राथ कार मैं बैठकर चलेंगे। विक्रम जी ने अपने स्रीधे पैर कौ स्टेरिंग पर रखा ऑर उल्टा पैर एक्सीलेटर
पर रखा ऑर गाड़ी को स्टार्ट कर चलाने लगे। काफ़ी देर तक उन्होंने मंत्री जी कौ कार चला कर दिखाई।
मंत्री जी भी उन्हें पैंगों से कार चलाते बड़े ध्यान से देख रहे थै। उन्होंने विक्रम जी कौ कार चलातें हुए एक
वीडियो भी बनाया।

पूरी वीडियो परिवहन आयुक्त को भ्रेजा गया जो अंतिम फैसला लेंगे। संभवत यह दैश का  पहला
मामला था जब दोनों हाथ नहीं होने के बाद भी किसी व्यिक्त ने यात्री टेस्ट दिया था। ऑर उनकी इतनी अच्छी ड्राड़विंग देखने के बाद लाइसेंस दैने के लिए नियम देखे गए कि क्या पैंरोँ से स्टेरिंग संभालने पर भी लाइसेंस जारी किया जा सकता हैं? उनका पूरा मैडिकल चेकअप भी हुआ क्योंकि अगर परिवहन विभाग विक्रम नी कौ लाइसेंस जारी करता हैँ तो यह देश का ऐसा पहला मामला ह्येगा जिसमें एक विशेष गुण यानी दिव्यांग व्यक्ति को सडकों पर गाडी
चल्राने की। आखिरकार विक्रम जी को ड्राइविंग लाइसेंस  दिया गया।

तो देखा बच्चों लक्य पाने के लिए कितनी भी बाधाएं आई पर विक्रम जी ने हमेशा अपना ध्यान सिर्फ लक्ष्य
प्राप्ति पर रखा। उसके बाद उन्होंने एक कार रेस में भी हिस्सा निया ऑर उसमें उन्होंने फर्स्ट प्राइस जीता।
बच्चों विक्रम जी सिर्फ कार ही नहीं चलाते थे। बल्कि उन्होंने कॉमर्स में प्रोस्ट ग्रेजुएशन भी किया ऑर आज
वह एक सफल व्यवसाई हैं। स्विमिंग भी बहुत अच्छी करते हैं। विक्रम जी लाखों लोगों की प्रेरणा हैं तभी तो
बच्चों लक्‍य बनाना ही नहीं हैं पूरा करने के लिए मेहनत भी करनी चाहिए।

                          🙏 धन्यवाद 🙏

Tuesday, 9 June 2020

हमेशा खुश रहिए।

Introduction

रिसर्च  बताती हैं कि जब हम किसी की मदद करते हैं तो हमारी खुशी तो बढ़ती ही है साथ-साथ  हमारी हैल्थ भी यानि सेहत भी अच्छी होती है और हमारा मूड भी अच्छा होता है। यह जरूरी नहीं कि आप किसी को कुछ सामान देकर या पैसे देकर ही मदद करें ।मदद करने की सोचें तो फिर आप किसी की भी मदद कैसे भी कर सकते हो। रोहन जानता था।रोहन एक छोटा बच्चा पाँचवी कक्षा  का बच्चा ।वो जब स्कूल के लिए निकला तो बारिश के दिनों में सड़कों पर थोड़ा पानी भर जाता है तो उसके घर और स्कूल के रास्ते में भी बारिश के कारण थोड़ा पानी भर गया। सारे लोग थोड़ा सा कूदकर उस पानी को पार करके आगे जा रहे थे। रोहन भी ऐसा ही कर रहा था लेकिन तभी रोहन ने देखा की एक बूढ़े अंकल भी कूदकर पानी पार करने की कोशिश कर रहे थे पर नहीं कर पा रहे थे ।तब रोहन ने कहा कि रुकिये अंकल। रोहन ने दाएं बाएं देखा और उसे सड़क के किनारे दो ईट नजर  आए उसने फटाफट दोनों ईट उठा  कर पानी के बीचो बीच रख दिया। फिर उस बुढ़े  अंकल को कहां आप आराम से इस पर पैर रखकर सड़क पार करें ।अंकल ने  ऐसा ही किया।तब उन्होंने आराम से और अब बिना कीचड़ में पैर रखकर सड़क के दूसरे किनारे आ गए ।आगे बाकी आने जाने वाले लोग भी ऐसा ही कर रहे थे  यानी ईट ऊपर पैर रखकर सड़क पार कर रहे थे। रोहन के इतने से काम के कारण सबको बहुत आसानी हुई ।किसी को भी कीचड़ में पैर रखकर रास्ता नहीं पार  करना था  या फिर कूदकर सड़क पार नहीं करनी थी। सभी आने जाने वाले ईटों के ऊपर पैर रखकर आगे बढ़ रहे थे ।देखा बच्चों रोहन ने सिर्फ थोड़ी सी समझदारी दिखाई और उस बूढ़े अंकल के बारे में सोचा तो  बाकी लोगों की भी  कितन  मदद हुई ।ऐसे ही हम अलग-अलग तरीकों से अलग-अलग रूप से सबकी मदद कर सकते हैं ।अगर आपका कोई दोस्त आपको कहता है कि मुझे तुमसे बात करनी है एक प्रॉब्लम है। आप भले प्रॉब्लम का सलूशन ना निकाल पाए पर वह आपके पास आया है तो आप उसकी सारी बातें सुन तो  सकते हैं। आप उसे अपना समय दे इसकी पूरी बात सुने ।तो भी उसकी मदद  है। उसे बहुत खुशी मिलती है ।आप बताएं बच्चों जीवो की मदद भी कर सकते हैं आप बस उन जीवो को कोई तकलीफ ना दे ।कुछ बच्चे मस्ती में सड़क के कंकड़ पत्थर उठाकर जानवरों पर फेंक कर मारते हैं जो बिल्कुल भी सही नहीं है आप उनके साथ अच्छा व्यवहार करें आपका अच्छा व्यवहार ही उनकी मदत है ।ऐसे ही आप पर्यावरण का भी ध्यान रखकर सबके लिए अच्छा काम कर सकते हैं पेड़ पौधों को कभी भी नुकसान नहीं पहुंचाना है ।यह भी उनके लिए एक मदद है आप जानवरों को कुछ खिला दे परिंदों के लिए दाना रखें पौधों को पानी दे फिर देखो आपको कितना सुकून मिलता है ।मदद का बहुत अलग-अलग रूप है कैसे जानते हैं हम अगली कहानी में कि हम किसी को अपनी बारी देकर भी उसकी मदद कर सकते हैंह
    
  Story 

               एक था बादशाह और उस बादशाह का था एक बेटा यानी कि राजकुमार राजा ने यह मन में सोचा था की जब उसका बेटा अच्छे से पूरे पढ़ाई कर लेगा यानी गुरुकुल से शिक्षा पूरी करके आएगा तब मैं अपने राज्य के हर जरूरतमंद की जरूरत पूरी करूंगा ।फिर एक दिन वह आया जब राजा बहुत खुश थे क्योंकि उनका बेटा पूरी शिक्षा लेकर राज्य में वापस आया था जिसकी खुशी में उस बादशाह ने ऐलान करवाया यानी की घोषणा करवाई अगले दिन से उसके राज्य में हर जरूरतमंदों की हर जरूरत पूरी की जाएगी पूरा राज्य में ढिंढोरा पिटवा या गया  कि जिसको जो कुछ भी चाहिए कल राज महल में आकर बता दे। उस राज्य के लोग तो बहुत खुश हो गए क्योंकि बच्चों हर व्यक्ति कभी ना कभी कोई ना कोई जरूरत होती ही है ।आर जब पता चले कि हमारी जरूरत पूरी होने वाली है तो खुशी तो होगी ही ।सब लोग अगले दिन का इंतजार करने लगे सोचने लगे कि हम राजा से यह कहेंगे। इस जरूरत को पूरा करने की मांग करेंगे। अगले दिन बादशाह के राज महल के बाहर बहुत लंबी लाइन लग गई बहुत सारी लोगों की भीड़ जमा हो गई मानो पूरा राज्य ही एक कतार में खड़ा था। उस लाइन में सबसे पीछे आदमी खड़ा था तभी उस आदमी के पीछे एक और आदमी आया उसने अपनी जगह उसे दे दी अब खुद सबसे पीछे हो गया भूत दिन भर ऐसा ही करता रहा जो कोई भी आता उसे अपनी जगह दे देते उधर राजा बारी बारी से सबकी जरूरतें पूरी करते जा रहे थे किसी ने कहा कि मुझे खेतों में पानी चाहिए ।किसी ने कहा कि मुझे अपना पक्का घर बनवाना है ।किसी ने कहा कि मेरे घर में बेटी की शादी करनी है उसमें आप मदद कर दीजिए। तो किसी ने कहा शाही वैद्य से मेरे बेटे का इलाज करवा दीजिए। जिस जिस को जो जो भी जरूरत थी सब ने बादशाह से  कहा और बादशाह ने उनकी जरूरतें भी पूरी की । सब लोग बादशाह की तारीफ  के साथ साथ उस व्यक्ति की भी तारीफ करते जा रहे थे जो सबको अपनी बारी देता जा रहा था ।यह बात बादशाह के कानों तक भी पहुंच गई पूरा दिन निकल गया और लोग अपनी जरूरत के हिसाब से वहां से लेते गए और चलते गए ।बहुत खुश थे कि आज हमको वह मिल गया जिसकी हमें जरूरत थी। पर उन अंकल को तो कोई फर्क ही नहीं पड़ता था। कि लोग अपनी जरूरत पूरी करते जा रहे हैं और वह सबसे पीछे ही है ।बादशाह को जब यह बात पता चली उन्होंने उस व्यक्ति को राजमहल के अंदर बुलवाया उससे कहा कि भाई आपका नंबर तो कब का आ जाता और आप जो मांगते वह पूरी करके अब तक घर भी चले जाते तुम ही क्या कर रहे हो और ऐसा क्यों कर रहे हो ? तुम सुबह से पीछे खड़े लोगों को आगे आकर अपनी जगह देते जा रहे हो और खुद अभी तक पीछे खड़े हो ।व्यक्ति ने जवाब दिया बादशाह जो आप कर रहे हैं मैं उतना तो नहीं कर सकता पर मैं भी कुछ देने की इच्छा रखता हूं क्योंकि असली मजा तो देने में है ।आपके पास देने के लिए लोगों को शाही खजाना है पर मेरे पास लोगों को देने के लिए मेरी बारी ही है ।मैं हर बार  अपनी बारी किसी और को दे देता हूं मुझे भी थोड़ा सुकून मिलता है ।बादशाह उसकी इस बात से बहुत प्रभावित हुआ और वह सोच रहे थे अगर देने का गुण हो तो कुछ ना होते हुए भी हम बहुत कुछ दे सकते हैं ।मेरे पास तो देने के लिए बहुत कुछ है इसके पास तो कुछ भी नहीं था फिर भी इसके कारण लोगों की मांग थोड़ी जल्दी पूरी हुई। बादशाह ने उसी वक्त उसे अपने राज महल में अच्छा सा पद देकर उसे काम पर रख लिया ।तो देखा बच्चों हम सभी के पास दूसरों को देने के लिए कुछ ना कुछ होता ही है बस देने का गुण होना चाहिए। हमें देना सीखना चाहिए। क्योंकि असली मज़ा तो देने में हैं।

                                🙏धन्यवाद 🙏


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असली मजा तो देने में है।


Tuesday, 2 June 2020

हमेशा भगवान की रजा में राजी रहना चाहिए ।




INTRODUCTION 

हमेशा भगवान की रजा में राजी होना चाहिए । यानी हमें हमेशा भगवान की  मर्जी म खुश होना चाहिए  क्योंकि अगर आप जो चाहते हैं वह  आपको मिलता है तो यह एक अच्छी बात है। पर अगर आप जो चाहते हैं वह आपको नहीं मिलता तो यह और भी अच्छी बात है क्योंकि भगवान की मर्जी से आपको कुछ और मिलना होता है।  ईश्वर का प्लान हमारे लिए सबसे बेहतर होता है ।इसीलिए हर हाल में बस शुकराना कीजिए और मुस्कुराइए।छोड़िये  शिकायत शुक्रिया अदा कीजिए।
 जितना है पास पहले उसका मजा लीजिए । इसीलिए तो हमें मुस्कुराहट के साथ भगवान जी को शुक्रिया अदा करने के साथ-साथ हमें सब के काम भी आना चाहिए सब की मदद करनी चाहिए । क्योंकि अगर आप किसी की मुस्कुराहट की वजह बनते हैं तो यह एक बहुत ही अच्छा ओर  नेक  काम है ।महेश भैया ने भी एक आंटी की मदद की और उन्हें औरों की मदद के लिए भी समझाया कैसे जानते हैं महेश भैया की कहानी से --

Story 
   
 एक बार एक आंटी किसी मॉल में शॉपिंग के लिए गई ।उन्हें वहां पर शॉपिंग करने में थोड़ा टाइम लग गया क्योंकि उन्हें घर  की जरूरत का सामान फल सब्जियां भी चाहिए था ।जब आंटी जी पूरी शॉपिंग करने के बाद  अपना सामान लेकर मॉल के बाहर आई तो उन्होंने दाएं बाएं देखा कि कोई गाड़ी रिक्शा मिल जाए ताकि वह अपने घर जा सके  । पर वह आंटी 10 मिनट तक खड़ी रही रही और उन्हें देर भी हो रही थी ,पर फिर भी कोई ऑटो रिक्शा खाली ही नहीं जा रहा था ।उनके पास सामान था तू उन्होंने वह सामान नीचे रख दिया  और आने जाने वाले साधन का इंतजार करने लगी। तभी महेश भैया उस रोड से अपनी कार से निकले तो उन्होंने देखा की एक आंटी जी सामान के साथ किसी रिक्शा या ऑटो रिक्शा का इंतजार कर रही है और वह थोड़ी परेशान भी लग रही है। महेश भैया ने कार आंटी के पास जाकर रोकी और कहा आंटी जी आइए मैं आपको घर तक छोड़ देता हूं।पर आंटी जी झिझक रही थी उसकी कार में बैठने से क्योंकि महेश भैया के कपड़े थोड़े मैली लग रहे थे, तब महेश भैया ने कहा, अरे आंटी जी आप बिल्कुल परेशान मत हो यह मेरे कपड़े टायर बदलने के कारण मैले हो गए हैं, अभी कुछ देर पहले मेरी गाड़ी का 1 टायर पंचर हो गया था उसी टायर को बदलने के कारण ऐसा हुआ है ।आप बेफिक्र रहें मैं आपको घर तक छोड़ दूंगा। उन्होंने बड़ी प्यार से आंटी जी को कहा तो फिर आंटी जी उसके साथ कार में बैठ गई फिर महेश भैया ने उनको वही छोड़ा जहां उनका घर था। जब वह आंटी अपने घर सुरक्षित पहुंच गई तब उनके चेहरे पर बड़ी प्रसन्नता थी वह बहुत खुश थी। मुस्कान के साथ उन्होंने महेश भैया को कुछ पैसे देने चाहे तब महेश भैया ने कहा नहीं आंटी जी मैंने तो बस आपकी मदद के लिए ऐसा किया था। आप भी मेरी इस मदद के बदले कुछ करना चाहती हैं तो बस यह याद रखिएगा , कि जब आपको लगे कि आप किसी की मदद कर सकती हैं तो उस वक्त आप उसकी मदद कर दीजिएगा ।आंटी जी ने उसको दिल से थैंक्स कहा और कहा बेटा हमेशा खुश रहो और उन्होंने महेश भैया से कहा कि मैं तुम्हारी दूसरों की मदद करने वाली बात भी हमेशा याद रखूंगी। फिर महेश भैया वहां से वापस आ गए। वह आंटी रोज की तरह सवेरे पार्क में जो उनके घर के पास था वहां पहले जाती थी यानी कि मॉर्निंग वॉक के लिए पार्क में जाति थी। बहुत सारे बच्चे भी खेलते थे। तब उन्होंने देखा कि बच्चा खेलते खेलते अचानक से गिर गया और उसे थोड़ी सी चोट भी आई थी ।आंटी को महेश भैया की बात याद आई कि जब आपको लगे कि आप किसी की मदद कर सकती हैं तो जरूर करना। आंटी जी जल्दी से उस बच्चे के पास  गई। वह बच्चा दर्द के कारण रो रहा था। उन्होंने कहा बिल्कुल चिंता मत करो मेरा घर पास में ही है, आओ मैं तुमको इसके ऊपर चोट का मरहम  लगा देती हूं। आंटी जी उस बच्चे को अपने साथ घर ले कर आई और पानी से उसकी चोट साफ करके हाथ पैर धुलाकर उसकी चोट पर मरहम लगाया और फिर बच्चे को बहुत आराम मिला। उससे फिर उन्होंने कहा चलो मैं तुमको तुम्हारे घर तक छोड़ देती हूं। वह बच्चा पार्क के पीछे वाली गली में रहता था। आंटी जी ने उसको उसके घर तक छोड़ा तो उनके घरवालों ने आंटी जी को थैंक्यू बोला और कहा आपका बहुत-बहुत धन्यवाद जो आपने इसको मरहम लगाया और उसको आप घर तक छोड़ने आई। आँटी जी ने कहा की सब को एक दूसरे की मदद करनी ही चाहिए। आप बस जल्दी से दूध गुनगुना करके उसमें थोड़ी सी हल्दी डालकर इसको पिला दीजिएगा तो यह और भी जल्दी ठीक हो जाएगा। बच्चों आपको पता है हल्दी क्या होती है बिल्कुल सही यह एक मसाले का काम करती है और यह बहुत गुणकारी होती है इसीलिए तो मम्मी आपकी सब्जियों में हल्दी डालती हैं। कई बार दर्द ठीक करने के लिए भी दूध में मिलाकर मम्मी या बच्चे बड़े सबको देती है।  किसी बच्चे ने कभी हल्दी वाला दूध पिया है?  अरे वाह पता है बच्चों यह सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है ।जीतू था बच्चों की हमें सब की मदद करनी चाहिए। हमें प्रकृति यानी पर्यावरण की भी मदद करनी चाहिए। पर्यावरण की मदद के लिए मनीष कुमार ने बहुत अच्छे से सोचा। गर्मियों में जब सभी लोग ऐसी चलाते हैं यानी एयर कंडीशन जिससे ठंडी ठंडी हवा आती है।  जो कमरे के अंदर बैठता है उसे तो ठंडी हवा लगती है लेकिन उसके बाहर बहुत गर्म हवा आती है जो कि पर्यावरण को प्रदूषित करतीरहती है। तो मनीष कुमार जी ने इसका एक इको फ्रेंडली वर्जन यानी कि मिट्टी का एसी बनाया जो पर्यावरण को बिल्कुल भी नुकसान नहीं पहुंचाता। उन्होंने टेराकोटा की मिट्टी से कोन शेप का सिलेंडर बनाकर उन्हें जोड़कर जैसे मधुमक्खी  घोंसला बनाती है ऐसे ऐसी बनाए और यह ऐसी    छोटे -बड़े ऑफिस के लिए फैक्ट्री इसके लिए। अब मजे की बात तो यह है कि यह बिना बिजली के चलने वाले एसी हैं यानी कि बिजली और पर्यावरण भी बचा पाते है।  इस मिट्टी के इसी से हम 7 से 8 डिग्री तापमान कम कर सकते हैं। आज दिल्ली में डेकी इलेक्ट्रॉनिक्स में बहुत सारे मिट्टी के ऐसी फैक्ट्री स्कूलों और ऑफिस के लिए बनाए जाते हैं।  वह पर्यावरण को बचाने में पर्यावरण की मदद के लिए बहुत कारगर भी सिद्ध हो रहे हैं। ऐसा ही पर्यावरण की मदद का काम अशोक हेगडे ने भी किया है। प्लास्टिक बैग जो पानी और पर्यावरण दोनों के लिए सही नहीं है तो उन्होंने सामानों को उठाने के लिए प्लास्टिक बैग जैसे दिखने वाले लेकिन पर्यावरण को बिल्कुल नुकसान न पहुंचाएं और मिट्टी पानी दोनों में घुल जाए ऐसे बैग्स बनाएं और उनके बैग का नाम उन्होंने रखा एंवी  ग्रीन जोकि साबूदाने की स्टार्ट से बनाए जाते हैं।  बच्चों हमें सब की मदद के साथ-साथ मदर नेचर यानी प्रकृति का बहुत ध्यान रखना चाहिए। चिड़ियों को छत पर दाना पानी देना गर्मियों में यह तो प्रकृति की मदद ही है। क्योंकि प्रकृति से ही तो हमें सब कुछ मिला है बस मन में मदद की इच्छा होनी चाहिए तब आप किसी की भी मदद कर सकते हैं।
                            🙏धन्यवाद🙏

 

Tuesday, 26 May 2020

मदद करो सबकी, अगर खुशियाँ पानी हैं जग की ।

People help others in every way
रिसर्च  बताती हैं कि जब हम किसी की मदद करते हैं तो हमारी खुशी तो बढ़ती ही है साथ-साथ  हमारी हैल्थ भी यानि सेहत भी अच्छी होती है और हमारा मूड भी अच्छा होता है। यह जरूरी नहीं कि आप किसी को कुछ सामान देकर या पैसे देकर ही मदद करें ।मदद करने की सोचें तो फिर आप किसी की भी मदद कैसे भी कर सकते हो। रोहन जानता था।रोहन एक छोटा बच्चा पाँचवी कक्षा  का बच्चा ।वो जब स्कूल के लिए निकला तो बारिश के दिनों में सड़कों पर थोड़ा पानी भर जाता है तो उसके घर और स्कूल के रास्ते में भी बारिश के कारण थोड़ा पानी भर गया। सारे लोग थोड़ा सा कूदकर उस पानी को पार करके आगे जा रहे थे। रोहन भी ऐसा ही कर रहा था लेकिन तभी रोहन ने देखा की एक बूढ़े अंकल भी कूदकर पानी पार करने की कोशिश कर रहे थे पर नहीं कर पा रहे थे ।तब रोहन ने कहा कि रुकिये अंकल। रोहन ने दाएं बाएं देखा और उसे सड़क के किनारे दो ईट नजर  आए उसने फटाफट दोनों ईट उठा  कर पानी के बीचो बीच रख दिया। फिर उस बुढ़े  अंकल को कहां आप आराम से इस पर पैर रखकर सड़क पार करें ।अंकल ने  ऐसा ही किया।तब उन्होंने आराम से और अब बिना कीचड़ में पैर रखकर सड़क के दूसरे किनारे आ गए ।आगे बाकी आने जाने वाले लोग भी ऐसा ही कर रहे थे  यानी ईट ऊपर पैर रखकर सड़क पार कर रहे थे। रोहन के इतने से काम के कारण सबको बहुत आसानी हुई ।किसी को भी कीचड़ में पैर रखकर रास्ता नहीं पार  करना था  या फिर कूदकर सड़क पार नहीं करनी थी। सभी आने जाने वाले ईटों के ऊपर पैर रखकर आगे बढ़ रहे थे ।देखा बच्चों रोहन ने सिर्फ थोड़ी सी समझदारी दिखाई और उस बूढ़े अंकल के बारे में सोचा तो  बाकी लोगों की भी  कितन  मदद हुई ।ऐसे ही हम अलग-अलग तरीकों से अलग-अलग रूप से सबकी मदद कर सकते हैं ।अगर आपका कोई दोस्त आपको कहता है कि मुझे तुमसे बात करनी है एक प्रॉब्लम है। आप भले प्रॉब्लम का सलूशन ना निकाल पाए पर वह आपके पास आया है तो आप उसकी सारी बातें सुन तो  सकते हैं। आप उसे अपना समय दे इसकी पूरी बात सुने ।तो भी उसकी मदद  है। उसे बहुत खुशी मिलती है ।आप बताएं बच्चों जीवो की मदद भी कर सकते हैं आप बस उन जीवो को कोई तकलीफ ना दे ।कुछ बच्चे मस्ती में सड़क के कंकड़ पत्थर उठाकर जानवरों पर फेंक कर मारते हैं जो बिल्कुल भी सही नहीं है आप उनके साथ अच्छा व्यवहार करें आपका अच्छा व्यवहार ही उनकी मदत है ।ऐसे ही आप पर्यावरण का भी ध्यान रखकर सबके लिए अच्छा काम कर सकते हैं पेड़ पौधों को कभी भी नुकसान नहीं पहुंचाना है ।यह भी उनके लिए एक मदद है आप जानवरों को कुछ खिला दे परिंदों के लिए दाना रखें पौधों को पानी दे फिर देखो आपको कितना सुकून मिलता है ।मदद का बहुत अलग-अलग रूप है कैसे जानते हैं हम अगली कहानी में कि हम किसी को अपनी बारी देकर भी उसकी मदद कर सकते है।
     
 Story 
              
 एक था बादशाह और उस बादशाह का था एक बेटा यानी कि राजकुमार राजा ने यह मन में सोचा था की जब उसका बेटा अच्छे से पूरे पढ़ाई कर लेगा यानी गुरुकुल से शिक्षा पूरी करके आएगा तब मैं अपने राज्य के हर जरूरतमंद की जरूरत पूरी करूंगा ।फिर एक दिन वह आया जब राजा बहुत खुश थे क्योंकि उनका बेटा पूरी शिक्षा लेकर राज्य में वापस आया था जिसकी खुशी में उस बादशाह ने ऐलान करवाया यानी की घोषणा करवाई अगले दिन से उसके राज्य में हर जरूरतमंदों की हर जरूरत पूरी की जाएगी पूरा राज्य में ढिंढोरा पिटवा या गया  कि जिसको जो कुछ भी चाहिए कल राज महल में आकर बता दे। उस राज्य के लोग तो बहुत खुश हो गए क्योंकि बच्चों हर व्यक्ति कभी ना कभी कोई ना कोई जरूरत होती ही है ।आर जब पता चले कि हमारी जरूरत पूरी होने वाली है तो खुशी तो होगी ही ।सब लोग अगले दिन का इंतजार करने लगे सोचने लगे कि हम राजा से यह कहेंगे। इस जरूरत को पूरा करने की मांग करेंगे। अगले दिन बादशाह के राज महल के बाहर बहुत लंबी लाइन लग गई बहुत सारी लोगों की भीड़ जमा हो गई मानो पूरा राज्य ही एक कतार में खड़ा था। उस लाइन में सबसे पीछे आदमी खड़ा था तभी उस आदमी के पीछे एक और आदमी आया उसने अपनी जगह उसे दे दी अब खुद सबसे पीछे हो गया भूत दिन भर ऐसा ही करता रहा जो कोई भी आता उसे अपनी जगह दे देते उधर राजा बारी बारी से सबकी जरूरतें पूरी करते जा रहे थे किसी ने कहा कि मुझे खेतों में पानी चाहिए ।किसी ने कहा कि मुझे अपना पक्का घर बनवाना है ।किसी ने कहा कि मेरे घर में बेटी की शादी करनी है उसमें आप मदद कर दीजिए। तो किसी ने कहा शाही वैद्य से मेरे बेटे का इलाज करवा दीजिए। जिस जिस को जो जो भी जरूरत थी सब ने बादशाह से  कहा और बादशाह ने उनकी जरूरतें भी पूरी की । सब लोग बादशाह की तारीफ  के साथ साथ उस व्यक्ति की भी तारीफ करते जा रहे थे जो सबको अपनी बारी देता जा रहा था ।यह बात बादशाह के कानों तक भी पहुंच गई पूरा दिन निकल गया और लोग अपनी जरूरत के हिसाब से वहां से लेते गए और चलते गए ।बहुत खुश थे कि आज हमको वह मिल गया जिसकी हमें जरूरत थी। पर उन अंकल को तो कोई फर्क ही नहीं पड़ता था। कि लोग अपनी जरूरत पूरी करते जा रहे हैं और वह सबसे पीछे ही है ।बादशाह को जब यह बात पता चली उन्होंने उस व्यक्ति को राजमहल के अंदर बुलवाया उससे कहा कि भाई आपका नंबर तो कब का आ जाता और आप जो मांगते वह पूरी करके अब तक घर भी चले जाते तुम ही क्या कर रहे हो और ऐसा क्यों कर रहे हो ? तुम सुबह से पीछे खड़े लोगों को आगे आकर अपनी जगह देते जा रहे हो और खुद अभी तक पीछे खड़े हो ।व्यक्ति ने जवाब दिया बादशाह जो आप कर रहे हैं मैं उतना तो नहीं कर सकता पर मैं भी कुछ देने की इच्छा रखता हूं क्योंकि असली मजा तो देने में है ।आपके पास देने के लिए लोगों को शाही खजाना है पर मेरे पास लोगों को देने के लिए मेरी बारी ही है ।मैं हर बार  अपनी बारी किसी और को दे देता हूं मुझे भी थोड़ा सुकून मिलता है ।बादशाह उसकी इस बात से बहुत प्रभावित हुआ और वह सोच रहे थे अगर देने का गुण हो तो कुछ ना होते हुए भी हम बहुत कुछ दे सकते हैं ।मेरे पास तो देने के लिए बहुत कुछ है इसके पास तो कुछ भी नहीं था फिर भी इसके कारण लोगों की मांग थोड़ी जल्दी पूरी हुई। बादशाह ने उसी वक्त उसे अपने राज महल में अच्छा सा पद देकर उसे काम पर रख लिया ।तो देखा बच्चों हम सभी के पास दूसरों को देने के लिए कुछ ना कुछ होता ही है बस देने का गुण होना चाहिए। हमें देना सीखना चाहिए। क्योंकि असली मज़ा तो देने में हैं।
                                   🙏 धन्यवाद 🙏

असली मजा तो देने में है।
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बांटने से ही बढ़ती हैं खुशियां। 
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Tuesday, 19 May 2020

जो मिला है, उसी में खुश रहना सीखिए ।


पता है बच्चों हमारा मन कभी भी एक चीज मिलने पर संतुष्ट नहीं होता अगर एक चीज मिल जाती है तो हमारा मन हमारे आगे किसी दूसरी चीज की इच्छा रख देता है जैसे मान लीजिए आपके पास एक खिलौना है पर थोड़े दिन बाद जब बाजार में कोई नया खिलौना देखते हैं या फिर अपने किसी दोस्त के पास नया खिलौना देखते हैं तो हमारा मन उसे लेने के लिए कहता है पर हमें ऐसा नहीं करना चाहिए अगर हमें किसी चीज की जरूरत नहीं है तो सिर्फ दूसरों के पास देखकर किसी चीज को उसे लेने का सोचना सही बात नहीं जो भी हमारे पास है हमें उसी में ही खुशी ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए!
इसीलिए तो कहते हैं
           ''दूसरों को देख कर मन नहीं भटकाना है   
             जो मिला है उसी से आगे बढ़ते जाना है                   
                   और सफलता को पाना है''


हां तोबच्चों इसलिए हमें जितना मिला है उस में खुश रहना चाहिए ।और अगर हमारी किसी भी चीज को पाने की इच्छा है तो धैर्य रखना चाहिए यानी कि सहनशीलता । हमारी सहन करने की ताकत ही हमारा धैर्य है ।क्योंकि किसी भी काम को पूरा करने में समय लगता है और अगर काम में कभी रुकावट आती भी है तो भी हमें धैर्य  रखना चाहिए ।बच्चों किसानको देखो वह मेहनत करके खेत तैयार करता है फिर उसमें बीज बोता है।और पानी भी देता उसे फसल तैयार करने के लिए बहुत दिनों तक धैर्य रखकर खेत में काम करना पड़ता तभी तो उसे अच्छी फसल मिलती है।
               कबीर दास जी ने भी कहा है -
     धीरे धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय ।
     माली सींचे सौ घड़ा ऋतु आए फल होय ।    धीरज रखने से ही फल भी मिलते हैं ।माली चाहे एक बार में पौधे में सौ घड़े पानी डालकर सीच ले लेकिन फल तो सही मौसम में ही आएंगे ।इसलिए धैर्य रखना होता है ।व्यापारी लोग भी व्यापार में बहुत सा धन लगाकर व्यापार में मुनाफे का इंतजार करते हैं ।विद्यार्थियों के पास पढ़ाई का काफी बोझ रहता है उनके पास बहुत सी किताबें होती हैं वह भी अलग-अलग विषयों की उनमें बहुत सारे पन्ने भी होते हैं उन्हें 1 दिन में नहीं पढ़ा जा सकता। धैर्य पूर्वक रोजाना थोड़ा थोड़ा मन लगाकर पूरे साल पढ़ना होता है। तब जाकर हम उस विषय का पेपर देते हैं और पास होकर अगली कक्षा में जाते हैं। कभी कभी किसी काम को करने में रुकावट आती है अगर हम मुसीबत में धैर्य से काम लेते हैं तो हमारी समस्या का समाधान आसानी से हो जाता है ।मुसीबत पड़ने पर घबराना नहीं चाहिए और धैर्य रखकर काम में जुटे रहना चाहिए तभी हमारा काम पूरा हो सकता है ।धैर्य से सब कुछ सम्भव हो सकता है यह बात जय ने अपने परिवार से सीखी थी ।
जानते हैं जय की कहानी से

Story-

               जय अपनी मम्मी-पापा और दादा-दादी के साथ रहता था अभी उसने सेवंथ क्लास पास करके वह आठवीं क्लास में आया था। तब वह बाजार में अपने पापा के साथ नई क्लास की कॉपी और किताबें लेने गया उसे वहां पर एक नया बैग भी बहुत पसंद आ गया। बताओ बच्चों आप भी जब जाते हैं कोई सामान लेने जैसे आप भी गए कॉपी किताब लेने गए  और आपको भी एक बैग पसंद आ जाता है ।लेकिन आपका पहला वाला बैग भी बिल्कुल सही है तब आपको क्या करना चाहिए? बच्चों बिल्कुल सही अगर आपका बेग पुराना नहीं  लगता है तो हमें पुराने बैग को ही यूज करना चाहिए ।क्योंकि  कुछ भी नया जो पसंद आ जाए उसे देख कर ले लेना जबकि अभी हमें उसकी जरूरत भी नहीं है तो यह सही नहीं है। क्योंकि जो हमारे पास है वह पर्याप्त है तो बच्चों जय ने अपने पापा से कहा पापा जी मुझे यह बात बहुत अच्छा लग रहा है आप मुझे ले दीजिए। तब जय के पापा ने कहा पिछली क्लास में आपको हमने सबसे अच्छा नया बैग ले कर दिया था ।और वह अभी भी नया ही लगता है तो अभी तुम्हें इस बैग की जरूरत नहीं है ।धीरज रखो अगले साल तुमको हम फिर एक नया बैग ले कर देंगे ।
  जय बहुत समझदार बच्चा था । उसने मन में सोचा पापा बिल्कुल सही कह रहे हैं मेरा बैग बिल्कुल नया ही तो लगता है। और मेरा पेंसिल बॉक्स भी नया ही है और मेरे पास कलर्स भी हैं ।तो मैं इनको अभी नहीं लेता हूं उसने अपने पापा से कहा अभी मुझे पेंसिल बॉक्स और कलर्स नहीं चाहिए जब जरूरत होगी तभी लूंगा।
 पापा ने कहा ठीक है ।फिर जय नयी कॉपी किताबें लेकर खुशी से घर आया। और रोज स्कूल जाने लगा नहीं था। उसमें उसे बहुत मज़ा आ रहा था। कुछ दिन के बाद उसका एक ड्राइंग कंपटीशन था ।उसने अपनी मम्मी से कहा मामा आज मेरा ड्राइंग कंपटीशन है ।मां  कहा बेटा आपने ड्रॉइंग शीट्स ,कलर ,पेंसिल्स, पेंट ब्रश ,सब अपने अपने बैग में रख ली है ना - जय ने कहा हां मां मैंने सब अपने बैग में रख लिया है ।फिर जय स्कूल पहुंचा तो उसे पर्यावरण बचाओ के ऊपर एक पोस्टर बनाना था वह बहुत खुश हो गया। अरे वाह इस पर तो मैं  बहुत अच्छा पोस्टर बना सकता हूं। फिर उसने सारा सामान बैग से निकाला। अरे वह तो अपना हरा रंग घर पर ही भूल गया है अब क्या होगा पर्यावरण में पेड़ और उसकी पत्तियों में तो हारा रंग भरना है, तभी तो अच्छी सी सीनरी बनेगी ।सभी रंग है लेकिन हरा रंग तो पेड़ पौधों में भरना  जरूरी है।सभी रंग है लेकिन हरा रंग तो है ही नहीं वह तो घर पर ही रह गया है कंपटीशन चल रहा है तो आप किसी दोस्त से भी कोई रंग नहीं ले सकते। अब जय क्या करेगा पर्यावरण बचाओ के लिए सबसे जरूरी हरा रंग तो उसके पास है ही नहीं। जय उदास हो गया लेकिन अचानक से उसे अपने दादाजी का एक किस्सा याद आया कि कैसे दादा जी ने कहा था कि कभी भी किसी भी मुसीबत में डरना नहीं चाहिए धैर्य रखकर समस्या का समाधान ढूंढना चाहिए। पता है बच्चों क्या हुआ था पिछले साल गर्मियों की छुट्टियों में वह अपने दादा जी के साथ दादा जी के पुराने गांव गया था गांव जाने के रास्ते में बीच में एक नदी थी बताओ बच्चों नदी पार हम किसके ऊपर बैठकर कर सकते हैं कुल सही नाव में बैठकर तो वह भी अपने दादा जी के साथ नदी पार करने के लिए एक नाव में बैठा। अभी नाव कुछ दूर ही चली थी कि नाव में एक छेद हो गया था और नाव में छेद से पानी भरने लगा। नाव डूबने का खतरा लगा सबको। नाव पर बैठे बाकी लोग बोलने लगे अरे हमें तो तौरना भी नहीं आता क्या करें। जल्दी नाव चलाओ ना भैया जल्दी कुछ करो। तब जय के दादाजी ने कहा घबराओ मत धैर्य रखो सब लोग मिलकर अपने दोनों हाथों से नाव का पानी बाहर निकालो। दादाजी की बात सुनकर सबको लगा सही बात है बीच नदी में हम कुछ नहीं कर सकते। हमें करना भी नहीं आता सभी लोग नाव का पानी बाहर निकालने में जुट गए। कितना पानी छेद से अंदर आ रहा था फटाफट सारे लोग मिलकर दोनों हाथों से पानी बाहर निकाल रहे थे और नाव चलाने वाले भैया जिसे हम मल्लाह भी कहते हैं बहुत  जल्दी-जल्दी नाव चला रहे थे। नाव तेजी से आगे बढ़ रही थी। सबकी आधे घंटे की मेहनत से नाव किनारे आ लगी। इस प्रकार धैर्य रखकर सभी लोगों की जान बच गई। धैर्य रखने से बड़ा से बड़ा खतरा भी टल जाता है जय के दादाजी ने सब को कहा किसी भी परेशानी में ऐसे ही धीरज रख कर समाधान ढूंढने से मंजिल में पहुंचने में आसानी होती है। तब जय को लगा मैं भी हार नहीं मानूंगा मुझे भी कुछ इसके लिए सोचना चाहिए मैं अपना कंपटीशन पूरा दूंगा और जरूर करूंगा। वह सोचने लगा कि वह क्या करें तभी उसे याद आया कि अरे एक बार ड्रॉइंग की क्लास में ड्राइंग टीचर ने सिखाया था कि अगर पीला और नीला रंग आपस में मिलाते हैं तो वह हरा रंग बन जाता है। फिर क्या था जय के चेहरे पर थी बड़ी वाली मुस्कान उसने जल्दी से पीला और नीला रंग आपस में मिलाया और बन गया हरा रंग उसने फटाफट सुंदर से पेड़ों में रंग भरा और अपना पोस्टर पूरा किया। देखा बच्चों हमारे पास जो है हम उसी में से ही सफल हो सकते हैं ।अगर जय यह सोचता कि मेरे पास हरा रंग तो है ही नहीं तो फिर मैं कैसे पर्यावरण बचाओ का पोस्टर पूरा कर सकता हूं तो वह इतना अच्छा पोस्टर नहीं बना पाता। उसने धीरज रखा और अपना ड्राइंग कंपटीशन पूरा किया इसलिए तो कहते हैं ना कि हमारे पास जो है वह बहुत खास है उसमें भी हम अपना काम पूरा कर सकते हैं बस हमें थोड़ा चेहरे की और उसे समझने की जरूरत होती है।
                               🙏धन्यवाद 🙏


असली मजा तो देने में है।
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बांटने से ही बढ़ती हैं खुशियां। 

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