INTRODUCTION
हमेशा भगवान की रजा में राजी होना चाहिए । यानी हमें हमेशा भगवान की मर्जी म खुश होना चाहिए क्योंकि अगर आप जो चाहते हैं वह आपको मिलता है तो यह एक अच्छी बात है। पर अगर आप जो चाहते हैं वह आपको नहीं मिलता तो यह और भी अच्छी बात है क्योंकि भगवान की मर्जी से आपको कुछ और मिलना होता है। ईश्वर का प्लान हमारे लिए सबसे बेहतर होता है ।इसीलिए हर हाल में बस शुकराना कीजिए और मुस्कुराइए।छोड़िये शिकायत शुक्रिया अदा कीजिए।
जितना है पास पहले उसका मजा लीजिए । इसीलिए तो हमें मुस्कुराहट के साथ भगवान जी को शुक्रिया अदा करने के साथ-साथ हमें सब के काम भी आना चाहिए सब की मदद करनी चाहिए । क्योंकि अगर आप किसी की मुस्कुराहट की वजह बनते हैं तो यह एक बहुत ही अच्छा ओर नेक काम है ।महेश भैया ने भी एक आंटी की मदद की और उन्हें औरों की मदद के लिए भी समझाया कैसे जानते हैं महेश भैया की कहानी से --
Story
एक बार एक आंटी किसी मॉल में शॉपिंग के लिए गई ।उन्हें वहां पर शॉपिंग करने में थोड़ा टाइम लग गया क्योंकि उन्हें घर की जरूरत का सामान फल सब्जियां भी चाहिए था ।जब आंटी जी पूरी शॉपिंग करने के बाद अपना सामान लेकर मॉल के बाहर आई तो उन्होंने दाएं बाएं देखा कि कोई गाड़ी रिक्शा मिल जाए ताकि वह अपने घर जा सके । पर वह आंटी 10 मिनट तक खड़ी रही रही और उन्हें देर भी हो रही थी ,पर फिर भी कोई ऑटो रिक्शा खाली ही नहीं जा रहा था ।उनके पास सामान था तू उन्होंने वह सामान नीचे रख दिया और आने जाने वाले साधन का इंतजार करने लगी। तभी महेश भैया उस रोड से अपनी कार से निकले तो उन्होंने देखा की एक आंटी जी सामान के साथ किसी रिक्शा या ऑटो रिक्शा का इंतजार कर रही है और वह थोड़ी परेशान भी लग रही है। महेश भैया ने कार आंटी के पास जाकर रोकी और कहा आंटी जी आइए मैं आपको घर तक छोड़ देता हूं।पर आंटी जी झिझक रही थी उसकी कार में बैठने से क्योंकि महेश भैया के कपड़े थोड़े मैली लग रहे थे, तब महेश भैया ने कहा, अरे आंटी जी आप बिल्कुल परेशान मत हो यह मेरे कपड़े टायर बदलने के कारण मैले हो गए हैं, अभी कुछ देर पहले मेरी गाड़ी का 1 टायर पंचर हो गया था उसी टायर को बदलने के कारण ऐसा हुआ है ।आप बेफिक्र रहें मैं आपको घर तक छोड़ दूंगा। उन्होंने बड़ी प्यार से आंटी जी को कहा तो फिर आंटी जी उसके साथ कार में बैठ गई फिर महेश भैया ने उनको वही छोड़ा जहां उनका घर था। जब वह आंटी अपने घर सुरक्षित पहुंच गई तब उनके चेहरे पर बड़ी प्रसन्नता थी वह बहुत खुश थी। मुस्कान के साथ उन्होंने महेश भैया को कुछ पैसे देने चाहे तब महेश भैया ने कहा नहीं आंटी जी मैंने तो बस आपकी मदद के लिए ऐसा किया था। आप भी मेरी इस मदद के बदले कुछ करना चाहती हैं तो बस यह याद रखिएगा , कि जब आपको लगे कि आप किसी की मदद कर सकती हैं तो उस वक्त आप उसकी मदद कर दीजिएगा ।आंटी जी ने उसको दिल से थैंक्स कहा और कहा बेटा हमेशा खुश रहो और उन्होंने महेश भैया से कहा कि मैं तुम्हारी दूसरों की मदद करने वाली बात भी हमेशा याद रखूंगी। फिर महेश भैया वहां से वापस आ गए। वह आंटी रोज की तरह सवेरे पार्क में जो उनके घर के पास था वहां पहले जाती थी यानी कि मॉर्निंग वॉक के लिए पार्क में जाति थी। बहुत सारे बच्चे भी खेलते थे। तब उन्होंने देखा कि बच्चा खेलते खेलते अचानक से गिर गया और उसे थोड़ी सी चोट भी आई थी ।आंटी को महेश भैया की बात याद आई कि जब आपको लगे कि आप किसी की मदद कर सकती हैं तो जरूर करना। आंटी जी जल्दी से उस बच्चे के पास गई। वह बच्चा दर्द के कारण रो रहा था। उन्होंने कहा बिल्कुल चिंता मत करो मेरा घर पास में ही है, आओ मैं तुमको इसके ऊपर चोट का मरहम लगा देती हूं। आंटी जी उस बच्चे को अपने साथ घर ले कर आई और पानी से उसकी चोट साफ करके हाथ पैर धुलाकर उसकी चोट पर मरहम लगाया और फिर बच्चे को बहुत आराम मिला। उससे फिर उन्होंने कहा चलो मैं तुमको तुम्हारे घर तक छोड़ देती हूं। वह बच्चा पार्क के पीछे वाली गली में रहता था। आंटी जी ने उसको उसके घर तक छोड़ा तो उनके घरवालों ने आंटी जी को थैंक्यू बोला और कहा आपका बहुत-बहुत धन्यवाद जो आपने इसको मरहम लगाया और उसको आप घर तक छोड़ने आई। आँटी जी ने कहा की सब को एक दूसरे की मदद करनी ही चाहिए। आप बस जल्दी से दूध गुनगुना करके उसमें थोड़ी सी हल्दी डालकर इसको पिला दीजिएगा तो यह और भी जल्दी ठीक हो जाएगा। बच्चों आपको पता है हल्दी क्या होती है बिल्कुल सही यह एक मसाले का काम करती है और यह बहुत गुणकारी होती है इसीलिए तो मम्मी आपकी सब्जियों में हल्दी डालती हैं। कई बार दर्द ठीक करने के लिए भी दूध में मिलाकर मम्मी या बच्चे बड़े सबको देती है। किसी बच्चे ने कभी हल्दी वाला दूध पिया है? अरे वाह पता है बच्चों यह सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है ।जीतू था बच्चों की हमें सब की मदद करनी चाहिए। हमें प्रकृति यानी पर्यावरण की भी मदद करनी चाहिए। पर्यावरण की मदद के लिए मनीष कुमार ने बहुत अच्छे से सोचा। गर्मियों में जब सभी लोग ऐसी चलाते हैं यानी एयर कंडीशन जिससे ठंडी ठंडी हवा आती है। जो कमरे के अंदर बैठता है उसे तो ठंडी हवा लगती है लेकिन उसके बाहर बहुत गर्म हवा आती है जो कि पर्यावरण को प्रदूषित करतीरहती है। तो मनीष कुमार जी ने इसका एक इको फ्रेंडली वर्जन यानी कि मिट्टी का एसी बनाया जो पर्यावरण को बिल्कुल भी नुकसान नहीं पहुंचाता। उन्होंने टेराकोटा की मिट्टी से कोन शेप का सिलेंडर बनाकर उन्हें जोड़कर जैसे मधुमक्खी घोंसला बनाती है ऐसे ऐसी बनाए और यह ऐसी छोटे -बड़े ऑफिस के लिए फैक्ट्री इसके लिए। अब मजे की बात तो यह है कि यह बिना बिजली के चलने वाले एसी हैं यानी कि बिजली और पर्यावरण भी बचा पाते है। इस मिट्टी के इसी से हम 7 से 8 डिग्री तापमान कम कर सकते हैं। आज दिल्ली में डेकी इलेक्ट्रॉनिक्स में बहुत सारे मिट्टी के ऐसी फैक्ट्री स्कूलों और ऑफिस के लिए बनाए जाते हैं। वह पर्यावरण को बचाने में पर्यावरण की मदद के लिए बहुत कारगर भी सिद्ध हो रहे हैं। ऐसा ही पर्यावरण की मदद का काम अशोक हेगडे ने भी किया है। प्लास्टिक बैग जो पानी और पर्यावरण दोनों के लिए सही नहीं है तो उन्होंने सामानों को उठाने के लिए प्लास्टिक बैग जैसे दिखने वाले लेकिन पर्यावरण को बिल्कुल नुकसान न पहुंचाएं और मिट्टी पानी दोनों में घुल जाए ऐसे बैग्स बनाएं और उनके बैग का नाम उन्होंने रखा एंवी ग्रीन जोकि साबूदाने की स्टार्ट से बनाए जाते हैं। बच्चों हमें सब की मदद के साथ-साथ मदर नेचर यानी प्रकृति का बहुत ध्यान रखना चाहिए। चिड़ियों को छत पर दाना पानी देना गर्मियों में यह तो प्रकृति की मदद ही है। क्योंकि प्रकृति से ही तो हमें सब कुछ मिला है बस मन में मदद की इच्छा होनी चाहिए तब आप किसी की भी मदद कर सकते हैं।
🙏धन्यवाद🙏

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