Wednesday, 8 July 2020

अपने लक्ष्य पर रखिए पहली नजर ।


बच्चों सब की यही इच्छा होती है कि कोई भी काम किया जाए उसमें सफलता हासिल हो। इतिहास में लोंगों को उनकी स्रफलता और उपलब्धियों के कारण याद किया जाता है। एक बार एक क्रामयाब व्यक्ति
का इंटरव्यू चल रहा था, काफी सारे पत्रकार उनको घेरकर उनसे सवात्र पूछ रहे थे। एक पत्रकार ने उनसे
सवाल किया सर॒ आप इतने सफल रहे हर क्षेत्र में आप की इस सफलता की उड़ान का क्‍या रहस्य हैं ? उन्होंने
 जवाब विया कि सबसे पहले हमें हमारे जीवन के लक्ष्य यानी उद्देश्य के बारे में जानना चाहिए।
अगर आपको अपनी मंजित्र नहीं पता हैं कि हमें कहां जाना हैं तब तक यात्रा नहीं कर सकते। इसलिए
सबसे पहले यह निश्चित करना जरूरी हैं कि हम जीवन में क्या बनना चाहते हैं इसीलिए त्लक्ष्य का होना बहुत जरूरी हैं। यदि जीवन मे कोर्ड हमारा लक्ष्य नहीं है तो यह ऐसा ही है जैसे कोई नाव हो बिना पतवार के।
 ईमानदारी से मेहनत करनी होगी।

सफलता की उडान के लिए किसी को प्रेरणा यानी कि किसी से सीख ल्रेकर जब हम कोई काम करते
है ऑर  प्रसीना चाहिए यानी कड़ी मेहनत। मेहनत ही हमें बच्चो हर काम में सफलता की चोटियों तक
ले जा सकती हैं।.....

जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने के लिए सबसे पहले जरुरी हैं सकारात्मक सोच हर व्यक्ति की अपनी काबिलियत ह्येती हैं और सभी को अपने गुणों के आधार पर ही अपने खुद के लक्ष्य बनाने चाहिए किसी दूसरे को देखकर नहीं। कोर्ई संगीत में अच्छा हो सकता हैं, कोई डांस में, किसी को गणित अच्छी लगती हैं तो किसी को डतिहास।
 जीवन मे आगे बढ़ने के लिए लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए।

अगर आपको दिशा पता हैं कि आपने किस रास्ते से जाना हैं तो मंजिल तक पहुंचना आसान हो जाता हैा  हैं। जैसे बच्चों आपको सवेरे सवेरे स्कूल जाना हैं तो आप जानते हैं कि कौन सा रास्ता आपको स्कूल की ओर ले जाता हैं और आप बिना रास्ता अटके अपनी स्कूल पहुंच जाते हैं। सोचो अगर रास्ता ना प्रता हो तो क्‍या मंजिन तक पहुंच पाएंगे?

जैसे बच्चो  हवा का रुख जिस दिशा में हो उसी दिशा की ओर बनेंगे तो हमारी ऊर्जा कम लगेगी। विपरीत
दिशा में चनेंगे तो वह ज्यादा लगेगी। वैंसे ही हमारा मन जिस काम में ज्यादा लगता हैं या हमारी रुचि
जिसमें ज्यादा होती हैं या जो गुण हमारे अंदर हैं उसके हिसाब से उद्देश्य बनाएंगे तो सफ़लता शीघ्र मिलती
हैं। फ़िर आपको यह जानना हैं कि आपको किस काम को करने में खुशी ज्यादा मिलती हैं। जिस काम को
करने की इ्चच्छा हो, अपनी कार्य क्षमता के साथ उसे पूरा करने के लिए जरुरी हैं। सही लक्ष्य का चुनाव, यही
सफल्रता की उड़ान का पहला कदम हैं।

बच्चों हम बात कर रहे है विक्रम जी की, जो देश के पहने व्यकित हैं जिन्हें पैसों से कार चलाने का लाइसेंस मिला। विक्रम जी छोटे थे उनको अपने दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद भी उन्होंने अपने जीवन में लक्ष्य बनाएं
और उस लक्षय को पाने के लिए उन्होंने बड़ी मेहनत की। उनके प्रिवार मैं उनके माता पिता ने हमेशा सिखाया जिंदगी जो भी दिन दिखाए मुस्कुराते हुए उसका सामना करना चाहिए। पहले विक्रम जी ने लक्ष्य बनाया की वह ज़रूरी काम के किसी पर निर्भर नहीं रहेंगे जैसे खाना प्रीना, पढ़ना लिखना। उनके दोनों
हाथ न होने के बाद भरी उन्होंने करो पैरों से ही पढ़ना लिखना और बाकी काम बढ़त मेहनत से सीखे ऑर अब वह अपने रोजमर्रा के कामो को अपने पैरों से करते हैं ऑर वह॒ किसी पर भी निर्भर नहीं हैं।

हालांकि विक्रम पहले से ही अपने सारे काम खुद से कर लेते थे लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि अपनी
 जरूरतों के निए वह दूसरों पर निर्भर हैं। क्‍योंकि विक्रम जी कॉलेज जाने के लिए खुद से रैडी हो जाते
थे लेकिन उनका दौस्‍त उनको लेने आता था उनको कॉलेज तक साथ  फ़िर कमी किसी कारण
से अगर उनका दौस्त नहीं आ पाता था तौ उनके प्रापा कौ अपना काम छोड़कर विक्रम जी को कॉलेज छोड़ने
जाना पड़्गा था। तब उन्होंने एक और लक्ष्य बनाया कि वह कार चलाना स्रीखेगें ऑर जहां जाना होगा खुद
से कार चला कर जाएंगे।

सुनने में उनका ल्रक्ष्य कितना मुश्किल लगता हैं? बच्चो? कि पैयों से कार चल्राना सीखना। विक्रम जी ने अपना
लक्ष तो बनाया कि वह कार चलाना स़रीखेगे ताकि उनके कारण किसी को परेशानी ना हो। लेकिन मुश्किलवाली बात थी कि उन्हें कार चलाना सिखाए कॉन?  फ़िर विक्रम जी एक ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट  गए। वही
स्कूल जहां कार चलाना स़िखाते है। वहाँ जाकर उन्होंने बोला कि मुझे कार चल्राना सीखना हैं तो आई
कर वहां के सर ने कहा कि आपके दोनों हाथ नहीं है आप कैंसे कार चलाना सीख सकते  हैं ।
विक्रम जी आरटीओ यानी रीजनत्र ट्रांसपोर्ट ऑफ्रिस ग्रए जहाँ से उनको ड्राड़विंग लाईसैंस मिल सके।

जब विक्रम जी आरटीओ ऑफिस गए तो उन्होंने अपने ड्राड़विंग लाईसैंस के ल्रिए प्रार्थना पत्र दिया तो ऑफिस
_वालों  ने उन्हें मना कर दिया कि ऐसा कोर्ड नियम नहीं हैँ जिसके बिना हाथों के पैरों से गाड़ी चलाने वाले कौ
लाइसेंस दिया जाए। वह ऑफिस से वापस आ गए पर उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं बदला।

उन्होंने फ़िर अपने राज्य के मंत्री जी कौ एक पत्र लिखा कि अगर हमारा नारा " सबका साथ सबका विकास"
 तो बिना हाथ  वाले व्यक्ति को ड्रड़विंग लाडसेंस क्यों नहीं मिल सकता। फ़िर विक्रम जी ने ट्रासपॉर्ट
कमिश्नर के आगे पैरों से कार चला कर विखाई। इसके बाद उस राज्य के मंत्री जी ने कहा कि हम आपके
स्राथ कार मैं बैठकर चलेंगे। विक्रम जी ने अपने स्रीधे पैर कौ स्टेरिंग पर रखा ऑर उल्टा पैर एक्सीलेटर
पर रखा ऑर गाड़ी को स्टार्ट कर चलाने लगे। काफ़ी देर तक उन्होंने मंत्री जी कौ कार चला कर दिखाई।
मंत्री जी भी उन्हें पैंगों से कार चलाते बड़े ध्यान से देख रहे थै। उन्होंने विक्रम जी कौ कार चलातें हुए एक
वीडियो भी बनाया।

पूरी वीडियो परिवहन आयुक्त को भ्रेजा गया जो अंतिम फैसला लेंगे। संभवत यह दैश का  पहला
मामला था जब दोनों हाथ नहीं होने के बाद भी किसी व्यिक्त ने यात्री टेस्ट दिया था। ऑर उनकी इतनी अच्छी ड्राड़विंग देखने के बाद लाइसेंस दैने के लिए नियम देखे गए कि क्या पैंरोँ से स्टेरिंग संभालने पर भी लाइसेंस जारी किया जा सकता हैं? उनका पूरा मैडिकल चेकअप भी हुआ क्योंकि अगर परिवहन विभाग विक्रम नी कौ लाइसेंस जारी करता हैँ तो यह देश का ऐसा पहला मामला ह्येगा जिसमें एक विशेष गुण यानी दिव्यांग व्यक्ति को सडकों पर गाडी
चल्राने की। आखिरकार विक्रम जी को ड्राइविंग लाइसेंस  दिया गया।

तो देखा बच्चों लक्य पाने के लिए कितनी भी बाधाएं आई पर विक्रम जी ने हमेशा अपना ध्यान सिर्फ लक्ष्य
प्राप्ति पर रखा। उसके बाद उन्होंने एक कार रेस में भी हिस्सा निया ऑर उसमें उन्होंने फर्स्ट प्राइस जीता।
बच्चों विक्रम जी सिर्फ कार ही नहीं चलाते थे। बल्कि उन्होंने कॉमर्स में प्रोस्ट ग्रेजुएशन भी किया ऑर आज
वह एक सफल व्यवसाई हैं। स्विमिंग भी बहुत अच्छी करते हैं। विक्रम जी लाखों लोगों की प्रेरणा हैं तभी तो
बच्चों लक्‍य बनाना ही नहीं हैं पूरा करने के लिए मेहनत भी करनी चाहिए।

                          🙏 धन्यवाद 🙏

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