पता है बच्चों हमारा मन कभी भी एक चीज मिलने पर संतुष्ट नहीं होता अगर एक चीज मिल जाती है तो हमारा मन हमारे आगे किसी दूसरी चीज की इच्छा रख देता है जैसे मान लीजिए आपके पास एक खिलौना है पर थोड़े दिन बाद जब बाजार में कोई नया खिलौना देखते हैं या फिर अपने किसी दोस्त के पास नया खिलौना देखते हैं तो हमारा मन उसे लेने के लिए कहता है पर हमें ऐसा नहीं करना चाहिए अगर हमें किसी चीज की जरूरत नहीं है तो सिर्फ दूसरों के पास देखकर किसी चीज को उसे लेने का सोचना सही बात नहीं जो भी हमारे पास है हमें उसी में ही खुशी ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए!
इसीलिए तो कहते हैं
''दूसरों को देख कर मन नहीं भटकाना है
जो मिला है उसी से आगे बढ़ते जाना है
और सफलता को पाना है''
हां तोबच्चों इसलिए हमें जितना मिला है उस में खुश रहना चाहिए ।और अगर हमारी किसी भी चीज को पाने की इच्छा है तो धैर्य रखना चाहिए यानी कि सहनशीलता । हमारी सहन करने की ताकत ही हमारा धैर्य है ।क्योंकि किसी भी काम को पूरा करने में समय लगता है और अगर काम में कभी रुकावट आती भी है तो भी हमें धैर्य रखना चाहिए ।बच्चों किसानको देखो वह मेहनत करके खेत तैयार करता है फिर उसमें बीज बोता है।और पानी भी देता उसे फसल तैयार करने के लिए बहुत दिनों तक धैर्य रखकर खेत में काम करना पड़ता तभी तो उसे अच्छी फसल मिलती है।
कबीर दास जी ने भी कहा है -
धीरे धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय ।
माली सींचे सौ घड़ा ऋतु आए फल होय । धीरज रखने से ही फल भी मिलते हैं ।माली चाहे एक बार में पौधे में सौ घड़े पानी डालकर सीच ले लेकिन फल तो सही मौसम में ही आएंगे ।इसलिए धैर्य रखना होता है ।व्यापारी लोग भी व्यापार में बहुत सा धन लगाकर व्यापार में मुनाफे का इंतजार करते हैं ।विद्यार्थियों के पास पढ़ाई का काफी बोझ रहता है उनके पास बहुत सी किताबें होती हैं वह भी अलग-अलग विषयों की उनमें बहुत सारे पन्ने भी होते हैं उन्हें 1 दिन में नहीं पढ़ा जा सकता। धैर्य पूर्वक रोजाना थोड़ा थोड़ा मन लगाकर पूरे साल पढ़ना होता है। तब जाकर हम उस विषय का पेपर देते हैं और पास होकर अगली कक्षा में जाते हैं। कभी कभी किसी काम को करने में रुकावट आती है अगर हम मुसीबत में धैर्य से काम लेते हैं तो हमारी समस्या का समाधान आसानी से हो जाता है ।मुसीबत पड़ने पर घबराना नहीं चाहिए और धैर्य रखकर काम में जुटे रहना चाहिए तभी हमारा काम पूरा हो सकता है ।धैर्य से सब कुछ सम्भव हो सकता है यह बात जय ने अपने परिवार से सीखी थी ।
जानते हैं जय की कहानी से
Story-
जय अपनी मम्मी-पापा और दादा-दादी के साथ रहता था अभी उसने सेवंथ क्लास पास करके वह आठवीं क्लास में आया था। तब वह बाजार में अपने पापा के साथ नई क्लास की कॉपी और किताबें लेने गया उसे वहां पर एक नया बैग भी बहुत पसंद आ गया। बताओ बच्चों आप भी जब जाते हैं कोई सामान लेने जैसे आप भी गए कॉपी किताब लेने गए और आपको भी एक बैग पसंद आ जाता है ।लेकिन आपका पहला वाला बैग भी बिल्कुल सही है तब आपको क्या करना चाहिए? बच्चों बिल्कुल सही अगर आपका बेग पुराना नहीं लगता है तो हमें पुराने बैग को ही यूज करना चाहिए ।क्योंकि कुछ भी नया जो पसंद आ जाए उसे देख कर ले लेना जबकि अभी हमें उसकी जरूरत भी नहीं है तो यह सही नहीं है। क्योंकि जो हमारे पास है वह पर्याप्त है तो बच्चों जय ने अपने पापा से कहा पापा जी मुझे यह बात बहुत अच्छा लग रहा है आप मुझे ले दीजिए। तब जय के पापा ने कहा पिछली क्लास में आपको हमने सबसे अच्छा नया बैग ले कर दिया था ।और वह अभी भी नया ही लगता है तो अभी तुम्हें इस बैग की जरूरत नहीं है ।धीरज रखो अगले साल तुमको हम फिर एक नया बैग ले कर देंगे ।
जय बहुत समझदार बच्चा था । उसने मन में सोचा पापा बिल्कुल सही कह रहे हैं मेरा बैग बिल्कुल नया ही तो लगता है। और मेरा पेंसिल बॉक्स भी नया ही है और मेरे पास कलर्स भी हैं ।तो मैं इनको अभी नहीं लेता हूं उसने अपने पापा से कहा अभी मुझे पेंसिल बॉक्स और कलर्स नहीं चाहिए जब जरूरत होगी तभी लूंगा।
पापा ने कहा ठीक है ।फिर जय नयी कॉपी किताबें लेकर खुशी से घर आया। और रोज स्कूल जाने लगा नहीं था। उसमें उसे बहुत मज़ा आ रहा था। कुछ दिन के बाद उसका एक ड्राइंग कंपटीशन था ।उसने अपनी मम्मी से कहा मामा आज मेरा ड्राइंग कंपटीशन है ।मां कहा बेटा आपने ड्रॉइंग शीट्स ,कलर ,पेंसिल्स, पेंट ब्रश ,सब अपने अपने बैग में रख ली है ना - जय ने कहा हां मां मैंने सब अपने बैग में रख लिया है ।फिर जय स्कूल पहुंचा तो उसे पर्यावरण बचाओ के ऊपर एक पोस्टर बनाना था वह बहुत खुश हो गया। अरे वाह इस पर तो मैं बहुत अच्छा पोस्टर बना सकता हूं। फिर उसने सारा सामान बैग से निकाला। अरे वह तो अपना हरा रंग घर पर ही भूल गया है अब क्या होगा पर्यावरण में पेड़ और उसकी पत्तियों में तो हारा रंग भरना है, तभी तो अच्छी सी सीनरी बनेगी ।सभी रंग है लेकिन हरा रंग तो पेड़ पौधों में भरना जरूरी है।सभी रंग है लेकिन हरा रंग तो है ही नहीं वह तो घर पर ही रह गया है कंपटीशन चल रहा है तो आप किसी दोस्त से भी कोई रंग नहीं ले सकते। अब जय क्या करेगा पर्यावरण बचाओ के लिए सबसे जरूरी हरा रंग तो उसके पास है ही नहीं। जय उदास हो गया लेकिन अचानक से उसे अपने दादाजी का एक किस्सा याद आया कि कैसे दादा जी ने कहा था कि कभी भी किसी भी मुसीबत में डरना नहीं चाहिए धैर्य रखकर समस्या का समाधान ढूंढना चाहिए। पता है बच्चों क्या हुआ था पिछले साल गर्मियों की छुट्टियों में वह अपने दादा जी के साथ दादा जी के पुराने गांव गया था गांव जाने के रास्ते में बीच में एक नदी थी बताओ बच्चों नदी पार हम किसके ऊपर बैठकर कर सकते हैं कुल सही नाव में बैठकर तो वह भी अपने दादा जी के साथ नदी पार करने के लिए एक नाव में बैठा। अभी नाव कुछ दूर ही चली थी कि नाव में एक छेद हो गया था और नाव में छेद से पानी भरने लगा। नाव डूबने का खतरा लगा सबको। नाव पर बैठे बाकी लोग बोलने लगे अरे हमें तो तौरना भी नहीं आता क्या करें। जल्दी नाव चलाओ ना भैया जल्दी कुछ करो। तब जय के दादाजी ने कहा घबराओ मत धैर्य रखो सब लोग मिलकर अपने दोनों हाथों से नाव का पानी बाहर निकालो। दादाजी की बात सुनकर सबको लगा सही बात है बीच नदी में हम कुछ नहीं कर सकते। हमें करना भी नहीं आता सभी लोग नाव का पानी बाहर निकालने में जुट गए। कितना पानी छेद से अंदर आ रहा था फटाफट सारे लोग मिलकर दोनों हाथों से पानी बाहर निकाल रहे थे और नाव चलाने वाले भैया जिसे हम मल्लाह भी कहते हैं बहुत जल्दी-जल्दी नाव चला रहे थे। नाव तेजी से आगे बढ़ रही थी। सबकी आधे घंटे की मेहनत से नाव किनारे आ लगी। इस प्रकार धैर्य रखकर सभी लोगों की जान बच गई। धैर्य रखने से बड़ा से बड़ा खतरा भी टल जाता है जय के दादाजी ने सब को कहा किसी भी परेशानी में ऐसे ही धीरज रख कर समाधान ढूंढने से मंजिल में पहुंचने में आसानी होती है। तब जय को लगा मैं भी हार नहीं मानूंगा मुझे भी कुछ इसके लिए सोचना चाहिए मैं अपना कंपटीशन पूरा दूंगा और जरूर करूंगा। वह सोचने लगा कि वह क्या करें तभी उसे याद आया कि अरे एक बार ड्रॉइंग की क्लास में ड्राइंग टीचर ने सिखाया था कि अगर पीला और नीला रंग आपस में मिलाते हैं तो वह हरा रंग बन जाता है। फिर क्या था जय के चेहरे पर थी बड़ी वाली मुस्कान उसने जल्दी से पीला और नीला रंग आपस में मिलाया और बन गया हरा रंग उसने फटाफट सुंदर से पेड़ों में रंग भरा और अपना पोस्टर पूरा किया। देखा बच्चों हमारे पास जो है हम उसी में से ही सफल हो सकते हैं ।अगर जय यह सोचता कि मेरे पास हरा रंग तो है ही नहीं तो फिर मैं कैसे पर्यावरण बचाओ का पोस्टर पूरा कर सकता हूं तो वह इतना अच्छा पोस्टर नहीं बना पाता। उसने धीरज रखा और अपना ड्राइंग कंपटीशन पूरा किया इसलिए तो कहते हैं ना कि हमारे पास जो है वह बहुत खास है उसमें भी हम अपना काम पूरा कर सकते हैं बस हमें थोड़ा चेहरे की और उसे समझने की जरूरत होती है।
🙏धन्यवाद 🙏
असली मजा तो देने में है।
https://vanshthawani07.blogspot.com/2020/04/blog-post_28.html
बांटने से ही बढ़ती हैं खुशियां।
https://vanshthawani07.blogspot.com/2020/05/blog-post.html

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