Tuesday, 12 May 2020

जो मिला है, बहुत मिला है।

INTRODUCTION :

छुक-छुक छुक-छुक चलती रेल गाड़ी,
        कभी यहाँ तो कभी वहां है, चलती रेल गाड़ी!
        दादा ji  के यहाँ भी जाती, नाना ji  के यहाँ भी जाती,
        छुक-छुक छुक-छुक चलती रेल गाड़ी !

आज तो दीपू बना था रेल गाड़ी का इंजन और सोनु ,चिटु और बिटु बने थे इसके ड़िबे ये सारे बच्चे एक दूसरे के पीछे, एक दूसरे के कपड़े पकड़ते हुए रेल गाड़ी का खेल खेलते थे कभी सोनू इंजन बनता तो कभी चिटू ऐसे करते करते सभी बच्चे  इंजन बनने का मजा लेते लेकिन इनमें से एक बच्चा राजू जो हमेशा गारड़ बनता था, और उन्हे रोकने के लिए लाल  झड़ी व चलने के लिए हरी झड़ी दिखाया करता था, वह  बस साइड में खड़ा होकर  उनके खेल को देखता  और उस खेल का हिस्सा बनता था,और वहीं पा8स के मकान में मानव रहता था वह बहुत दिनों से ईन बच्चो का यह खेल देख रहा था वह देखता कि कभी कोई बच्चा  इंजन बना है, तो कभी कोई बच्चा , सभी बच्चे इंजन बनने का मजा भी लेते और ड़िबे बनने का भी बस एक ही बच्चा था जो रोज गार्ड बनता था यह बात मानव को समझ नहीं ,आई फिर अगले दिन जब वह सारे बच्चे रेल गाड़ी का खेल, खेल रहे थे तब भी वही बच्चा गार्ड बना था ,अब तो मानव से रहा नहीं गया मानव  उन बच्चों के पास गया उनका खेल देखने लगा और जैसे ही उन बच्चों ने अपना खेल खत्म किया तो मानव उस गार्ड बच्चे के पास गया और उससे उसका नाम पूछा कि आपका नाम क्या है? उसने कहा 'राजू ' तब मानव ने पूछ ही लिया कि राजू  आप रोज इन बच्चों के साथ यह रेल गाड़ी का खेल खेलते हो मैं  आपको देखता हूँ पर मुझे यह समझ नहीं आता कि राजू  आप ही रोज गार्ड क्यो बनते हो!क्या आपको  इंजन और ड़िबे बनना अच्छा नहीं लगता है या ये बच्चे  आपको बनने नहीं देते तब राजू ने बहुत ही मासूमियत से कहा'' भैया ऐसा नहीं है मुझे भी कभी  इंजन तो कभी ड़िबे बनने का मन करता है भैया वह ऐसा होता था न की जब पहले हम खेल शुरू करते थे तो हमें यह सोचने में बहुत समय लग जाता था की कौन इंजन बनेगा कौन डिब्बा बनेगा और कौन गार्ड बनेगा ऐसा तय करते करते कितनी ही बार तो खेल का समय ही निकल जाता तब हम खेल भी नहीं पाते थे तब एक दिन मैंने सोचा की क्यूँ ना मैं ही हमेशा गार्ड बन जाऊं ताकि हम खेल को सही समय पर शुरू कर दे और खेल को ज्यादा देर तक खेल भी पायें और भैया आपको पता है गार्ड बनना कितना अच्छा होता है  क्योंकि गाड़ी को कण्ट्रोल  करने की  सारी ताकत तो गार्ड के पास ही होती है गार्ड ही तो होता है जो रेलगाड़ी को हरी झंडी दिखाकर आगे जाने देता है और लाल झंडी दिखाकर गाड़ी को रोक भी सकता है, इसीलिए मैं गार्ड बनता हूं और हम सब खेल भी पाते है और मज़े भी कर लेते है राजू की बातें सुनने के बाद मानव ने सोचा कि राजू की इन बातों में कितनी बड़ी बात छुपी हुई है कितना बड़ा खुशियों का खजाना छुपा हुआ है खेलते समय राजू का मन भी कभी इंजन या कभी डिब्बे बनकर खेलने का करता था पर फिर गार्ड बनने के लिए कोई भी बच्चा तैयार नहीं होता था और वे सब खेल नहीं पाते थे इसलिए उस खेल में राजू हमेशा गार्ड बनता था पर फिर भी वह खुश रहता था क्युकी जो पार्ट उसे उस खेल में मिला था वह उसी में खुश रहता था तब मानव ने सोचा, “ सब सही कहते है की जो भी हमारे पास है वह कितना खास है  उनमें भी तो खुशियां हैं बस जरूरत होती है हमें उसमें अपनी खुशी ढूंढने की जो भी हमारे पास होता है यानी कि जो भी हमें प्राप्त है वह अपने आप में पर्याप्त है जरूरत होती है हमें उसको समझने की उसको महसूस करने की इसीलिए तो कहते हैं!
                   ''दूसरों को देख कर मन नहीं भटकाना है                     जो मिला है उसी से आगे बढ़ते जानाहै
                   और सफलता को पाना है'

और बच्चो आज हम बात करेंगे इसी बारे में कि'' जो प्राप्त है वही पर्याप्त है '' मतलब की जो हमें मिला है जो भी हमारे पास है वही हमारे लिए पर्याप्त होता है बस  जरूरत होती है हमें उसमें अपनी खुशी ढूंढने की

Story-1 


           आकांक्षा अपने परिवार के साथ रहती थी । जिसमें आकांक्षा के मम्मी पापा  बड़ी बहन और एक बड़ा भाई था।आकांक्षा का परिवार एक साधारण परिवार था। आकांक्षा  छोटी थी लेकिन पढ़ने में बहुत होशियार थी ।इस साल आकांक्षा ने 5th पास की और जिस स्कूल में वह पढ़ती थी वह 5th तक ही था  तो उसे स्कूल में एडमिशन लेना था।तो आकांक्षा के बड़े भाई ने अपने पापा से कहा कि पापा आकांक्षा पढ़ने में बहुत अच्छी है तो क्यों ना इसका एडमिशन किसी अच्छे स्कूल में करवाया जाए। पापा ने कहा हां बात तो ठीक है। फिर पढ़ाई में होशियार होने के कारण आकांक्षा को एडमिशन भी मिल ही जाएगा। आकांक्षा के पापा ने उसका ऐडमिशन एक बड़े स्कूल में करवाया । क्योंकि वह पढने में होशियार थी तो उसका ऐडमिशन आसानी से हो गया। अच्छा स्वभाव होने के कारण वो नए स्कूल में सारे बच्चों के सा अच्छे से घुल मिल गई थी। उसे अपना नया स्कूल और वहां की सारी टीचर काफी अच्छी लग रही थी। वैसे तो सभी विषयों यानी सब्जेक्ट की टीचर के साथ सारे बच्चों को बहुत प्यार था पर सिक्स क्लास की पूनम मैडम से सभी बच्चे बहुत प्यार करते थे। वह उनकी क्लास टीचर थी और वह नैतिक शिक्षा यानी मोरल साइंस का विषय पढ़ाती थी जिसमें हमें अच्छी-अच्छी बातें प्रेरणादायक कहानियों के साथ सिखाई जाती हैं जैसे इमानदारी, आत्मविश्वास, शिष्टाचार, परिवार और समाज की वैल्यू। तो आज जो पाठ पूनम मैडम पढ़ाने वाली हैं उसका विषय है जो प्राप्त है वही पर्याप्त है। पूनम मैडम ने कहा कि हमें जो कुछ भी भगवान ने दिया है बहुत दिया है हमें उसका शुक्रिया अदा करना चाहिए किसी से कभी तुलना नहीं करनी चाहिए।
फिर पूनम मैडम ने सुकरात की कहानी सुनाने लगी जो कि उस पाठ में थी। यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात की कहानी। सुखराम एथेंस के बड़े विद्वान थे सुकरात जी बड़े सरल और प्रेमी स्वभाव के थे और हमेशा सत्य चिंतन में इतने व्यस्त रहते थे की उन्हें खाने पीने की भी याद नहीं रहती थी। वह जहां भी थोड़े लोगों को एक साथ बैठा देखते तो ज्ञान की चर्चा करने लगते। एक बार सुकरात अपनी शिष्य मंडली के साथ ज्ञान की बातों में व्यस्त थे तभी वहां घूमते घूमते एक आदमी आया। उन्होंने सुकरात और उनके शिष्यों के बीच जाकर कहा की मैं चेहरा देखकर व्यक्ति के बारे में बता सकता हूं कि यह इंसान कैसा है। सुकरात क्योंकि देखने में सुंदर नहीं थे लेकिन लोग उन्हें उनके सुंदर विचारों और सुंदर मन के कारण बहुत अधिक पसंद करते थे, उस आदमी ने सुकरात को देखकर कहा की आपकी बड़ी बड़ी चौड़ी नाक देख कर लगता है कि आपके अंदर क्रोध की भावना प्रबल है। यह सुनकर सुकरात के शिष्य नाराज हो गए लेकिन सुकरात ने आदमी को को अपनी बात पूरी करने का मौका दिया। आदमी ने आगे कहना चालू किया। उन्होंने कहा आपका माथा देख कर लगता है कि आप निश्चित रूप से एक लालची इंसान होंगे। आपके चेहरे की बाकी बनावट देख कर लगता है कि आप देश हित के लिए नहीं सोचते होंगे। यह सब सुनकर सुकरात ने उस आदमी को इनाम देकर भेज दिया। यह देख कर सुकरात के शिष्य हैरान रह गए उन्होंने सुकरात से पूछा की आपने ऐसा क्यों किया? उन्होंने सब तो गलत बताया। सुकरात ने मुस्कुराकर कहा हो सकता है की मेरे अंदर यह सब कमियां थोड़ी बहुत हो और मैं यह जानता हूं कि भगवान ने मुझे शारीरिक रूप से सुंदर नहीं बनाया है। बस वह आदमी एक बात बताना भूल गए कि भगवान ने मुझे विवेक शक्ति भी दी है जिसके कारण मैं इन सारी बुराइयों पर अंकुश लगाकर रखता हूं ।भगवान ने मुझे मस्तिष्क तो अच्छा दिया है मेरे विचार तो अच्छे दिए हैं जिसके लिए मैं भगवान का हर पल शुक्रिया अदा करता हूं की जिसके कारण मैं इतना ज्ञान अर्जित कर पाया तो क्या हुआ अगर मेरे पास सुंदर शरीर नहीं सुंदर मन और मस्तिष्क तो दिया है इसलिए जो प्राप्त है वही पर्याप्त है। हमें उसी में ही खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए दूसरों से तुलना नहीं करनी चाहिए कि उसके पास तो यह है उसके पास वह है हमारे पास नहीं है। पहले देखो तो आपके पास भी बहुत लोगों से बहुत ज्यादा है यानी जो दिया है भगवान ने बहुत दिया है। फिर पूनम ने कहा इसलिए बच्चों हमेशा जो मिले उसके लिए शुक्रिया अदा करना चाहिए। पूनम ने बच्चों से कहा बच्चों आपको कुछ पूछना है इस पाठ में से तो पूछो तभी एक बच्चे ने कहा मैडम मेरे मम्मी पापा हमेशा मुझे डांटते रहते हैं तो इस बात का शुक्रिया कैसा सपना मैडम ने कहा शुक्र करो आपके माता पिता तो आपके साथ है वह आपके सच्चे दोस्त हैं आपके शुभचिंतक है और उन्हें आपकी काबिलियत पर भरोसा है तभी तो आप की गलतियों और असफलताओं पर आप को डांटते हैं समझाते हैं ता कि वह गलती दोबारा ना करें फिर दूसरे बच्चे ने कहा स्कूल में टीचर मुझे टेस्ट में कम नंबर आने पर डांटते हैं तो इस बात का कैसा शुक्रिया तब पूनम ने कहा शुक्र करो कि आपको पढ़ाई का मौका मिला है आपको अच्छे टीचर मिले हैं जो आपके हितेषी हैं आपसे अच्छे रिजल्ट की उम्मीद रखते हैं तभी तो कम नंबर आने पर डांटते हैं ताकि आप आगे से और अच्छा पढ़ें। फिर एक बच्चे ने कहा कि मैं एक अच्छा खिलाड़ी हूं लेकिन मुझे खेल के मैदान में हमेशा एक्स्ट्रा प्लेयर यांत्रिक खिलाड़ी बना कर बाहर बैठा देते हैं टीम में शामिल नहीं करते तो इस बात का कैसा शुक्रिया ।तब पूनम ने कहा शुक्र करो कि आप एकदम स्वस्थ है कोई भी खेल खेल सकते हैं और आप टीम के लिए एक्स्ट्रा प्लेयर तो हो आप में अच्छे खिलाड़ी की संभावना को देखते हैं एक दिन टीम में आपको जरूर जगह मिलेगी। क्यों क्योंकि आप लेयर तो हो अच्छे आप अच्छे खिलाड़ी हैं फिर एक बच्चे ने कहा कि मुझे घर पर सारे छोटे बड़े काम सब लोग मुझसे करवाते हैं क्योंकि मैं घर में छोटा हूं तो फिर रिश्ता कैसा शुक्रिया पूनम मैडम ने कहा अरे शुक्रिया करो घर वाले तुम्हें इस लायक समझते हैं और फिर तुम्हें बुद्धिमान समझते हैं और बिना काम के तो जीवन नहीं होता आप काम सीखे मेहनती  बने फिर एक और बच्चे ने कहा मैडम मैं जब भी टीवी देखता हूं तब मेरा बड़ा भाई मुझसे रिमोट लेकर डांटता है कि इतनी टीवी नहीं देखते त पुणे मैडम ने कहा इसका भी शुक्रिया करो क्योंकि तुम्हारे बड़े भाई को तुम्हारी सेहत और आंखों की सुरक्षा का ख्याल है क्योंकि ज्यादा देर तक टीवी नहीं देखनी चाहिए सब लोगों को बच्चों को समझ आ गया कि हमें जो भी मिला है उसका शुक्रिया करना चाहिए फिर उसके बाद पूनम मैडम क्लास के बाहर चली गई फिर कुछ दिनों के बाद शिक्षक दिवस यानी टीचर डे आने वाला था सभी बच्चों ने कहा हम सुंदर सुंदर ग्रीटिंग कार्ड खरीद कर लाएंगे और अपनी सभी टीचर्स को देंगे बच्चों बताओ टीचर्स डे कब और क्यों मनाया जाता है बिल्कुल सही 5 सितंबर को टीचर्स डे मनाया जाता है हमारे देश के पहले उपराष्ट्रपति डॉक्टर सर्व पल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है वह खुद भी बहुत अच्छे शिक्षक थे इस दिन शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है सभी बड़े खुश है कि कितना मजा आएगा टीचर्स डे पर आकांक्षा फिर वापस आई थोड़ी चिंता में थी उसकी बड़ी बहन ने पूछा क्या हुआ आकांक्षा क्या सोच रही हो आकांक्षा ने कहा दीदी अगले हफ्ते शिक्षक दिवस आ रहा है सारे बच्चे बाजार से ग्रीटिंग कार्ड खरीद कर टीचर्स को देने वाले हैं पर मेरे पास तो इतने पॉकेट मनी नहीं है कि मैं सारी टीचर्स के लिए ग्रीटिंग कार्ड खरीदें तब आकांक्षा की दीदी ने कहा बस इतनी सी बात कोई बात नहीं अगर  आप कहां से नहीं खरीद सकते किसी ने कहा थोड़ी की बाहर से ही खरीद कर दो यही तो भाव है और हमारे पास जितना है काफी है तुम खुद से अपने हाथों से बहुत सुंदर सुंदर ग्रीटिंग कार्ड बनाकर अपनी टीचर्स को दे सकती हो तब आकांक्षा ने पूछा दीदी किससे बनाऊं मैं कार्ड दीदी ने कहा हमारे पास शादी के इन्विटेशन के कितने सारे पुरानी कार्ड पड़े हैं तुम उनमें से बाहर की कवर को लेकर सुंदर फूलों की की कटिंग करके उस पर चिपका कर ग्रीटिंग कार्ड बना सकती हो और किसी पर अपने ड्राइंग शीट लेकर कुछ अच्छा सा पेंट करके भी ग्रीटिंग कार्ड बना सकती हो और किसी कार्ड पर सितारे मोती चिपकाकर भी बहुत सुंदर ग्रीटिंग कार्ड बना सकती हो आकांक्षा तो यह सुनकर बहुत खुश हो गई कि हां दीदी यह तो बहुत अच्छा आईडिया है मैं जल्दी से जाकर सारे पुराने शादी समारोह  के कार्ड लेकर आती हूं और मैं बहुत सुंदर कार्ड बनाऊंगी उसके बाद आकांक्षा कार्ड बनाने में जुट गई उसने बहुत सुंदर सुंदर कार्ड बनाए आकाश के अंदर अपनी टीचर्स के लिए बहुत अच्छे अच्छे वाक्य भी लिखें टीचर्स डे पर उसमें वह सारे के सारे ग्रीटिंग अपनी टीचर्स को दिए उसकी ग्रीटिंग कार्ड सबसे अलग थी क्योंकि वह कार उसने हाथों से मेहनत करके बनाए थे सारी टीचर्स को बहुत पसंद है उसे भी बहुत खुशी हुई तो देखा बच्चों किसी भी काम के लिए बहुत सारे संसाधनों की जरूरत नहीं होती है हमारे पास जितना है हम उससे भी बहुत कुछ कर सकते हैं जो हमारे पास है उस में खुश रहना है जो अगर थोड़ा बहुत नहीं है उसकी शिकायत नहीं करनी है हम उतने में ही अच्छा सोचेंगे अच्छी कल्पना करेंगे और अच्छे भाव रखेंगे तो जरूर हर काम में सफल होंगे और ढेर सारी खुशियां मिलेगी तो बच्चों दूसरों को देख कर मन नहीं भटका ना है जितना मिला है उसमें ही खुशियों को पाना है और आगे बढ़ते जाना है। 
                               🙏 धन्यवाद 🙏


असली मजा तो देने में है।

https://vanshthawani07.blogspot.com/2020/04/blog-post_28.html

बांटने से ही बढ़ती हैं खुशियां।

https://vanshthawani07.blogspot.com/2020/05/blog-post.html

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