सभी बच्चों की इंटरेस्ट अपने अपने होते हैं किसी को साइंस पढ़ने में मजा आता है तो किसी को मैथ्स पढ़ने में मजा आता है तो किसी की ड्राइंग बहुत अच्छी होती है ।अगर आपकी ड्राइंग अच्छी है तो आप एक अच्छे कलाकार बनेंगे ।साइंस पढ़ने में अच्छे हैं तो आप डॉक्टर इंजीनियर टीचर भी बन सकते हैं तो आपको अपनी काबिलियत और रूचि के अनुसार ही सब्जेक्ट का सिलेक्शन करना चाहिए। यही बात सोनाली आंटी ने अपनी बेटे भी समझाई। कैसे आइए जानते हैं रोहन की कहानीसे
Story..
उन्होंने भी रोहन को समझाया की देखा देखी नहीं अपने हिसाब से ही विषयों का चुनाव करना चाहिए रोहित आठवीं क्लास का बच्चा बहुत अच्छा बच्चा। कभी भी स्कूल मिस नहीं करता था ।उसकी अटेंडेंस भी पूरी रहती थी। सारी टीचर्स उसकी तारीफ करते थे क्योंकि रोज स्कूल जाना तो अच्छी बात है। बच्चों 1 दिन रोहन के स्कूल में अपने दो दोस्तों को बात करते हुए सुना ।वह आपस में बात कर रहे थे कि हम बड़े होकर पायलट बनेंगे और आसमान में एरोप्लेन को उड़ाएंगे। उस दिन रोहन घर आकर अपनी मम्मी से कहा मम्मी आपको पता है मैं बड़ा होकर क्या बनना चाहता हूं? माँ ने कहा नहीं बेटा आप ही मुझे बता दो कि आप क्या बड़े होकर क्या बनना चाहते हो? रोहन ने कहा नहीं मम्मी ऐसे नहीं बताऊंगा मैं आपको एक हिंट देता हू।हूं फिर आप बताना कि मैं बड़े होकर क्या बनना चाहता हूं मां ने का ठीक है । रोहन ने कहा मम्मा आप ध्यान से - आसमान में उड़ जाऊं दुनिया की में सैर कराऊ
हर कोई इस में बैठना चाहे मेरी संग संग सैर कराए।
अच्छा बताओ बच्चों रोहन क्या बनना चाहता है बिल्कुल सही पायलट
मम्मी ने कहा अच्छा तो तुम बड़े होकर पायलट बनोगे। रोहन ने कहा बिल्कुल सही मम्मा। उसकी माँ ने कहा चलो अभी तो तुम हाल फ़िलहाल हाथ मुंह धोकर खाना खाओ और पढ़ने बैठो रोहन ने कहा कि ठीक है मां
फिर कुछ दिनों के बाद रोहन ने अपनी क्लास के बाहर दो बच्चों को बात करते सुना कि हम तो सचिन तेंदुलकर जैसे बनेंगे ।बताओ बच्चों सचिन तेंदुलकर कौन है? बिल्कुल सही क्रिकेटर। वह दोनों बच्चे भी बड़े होकर क्रिकेटर बनना चाहते थे। और देश के लिए खेलना चाहते थे तब रोहन के मन में आया मैं भी क्रिकेटर बनूंगा ।उस दिन जब वह छुट्टी के बाद घर आया तोआते ही उसने अपनी माँ को कहा मम्मी आप बताएं कि मैं अब बड़ा होकर क्या बनना चाहता हूं?माँ ने पूछा बताओ बेटा आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हो? रोहन ने कहा ऐसे नहीं मां मैं आपको एक क्लू देता हूं चौके छक्के मैं हूं लगाता बैट बॉल को दूर भगाता ।
एक बार जो देखने आता हर चौक के छक्के पर शोर मचाता ।
मैंने कहा अच्छा तो आप बड़े होकर क्रिकेटर बनना चाहते हैं। पर कुछ दिन पहले तो आप आसमान की सैर करना चाहते थे पायलट बनना चाहते थे ।रोहन ने कहा पायलट बनना कैंसल मम्मी मैं बड़ा होकर क्रिकेटर बनूंगा। मम्मी ने कहा ठीक है आप बड़े होकर भले क्रिकेटर बनना लेकिन इसके लिए आपको फिट रहना पड़ेगा टाइम पर खाना खाना होगा एक्सरसाइज करनी होगी। रोहन ने कहा हां हां हां मुझे पता है मैं खूब मेहनत करूंगा। सारे बच्चों को अपनी क्लास टीचर से लगाव होता है 1 दिन रोहन की क्लास टीचर बच्चों को क्लास में बड़े अच्छे तरीके से हिंदी की कविता पढ़कर सुना रही थी सारे बच्चे ध्यान से मस्त होकर उनकी कविता सुन रहे थे तब रोहन के मन में आया मैं भी अपनी टीचर की तरह बड़ा होकर एक टीचर ही बनूंगा उस दिन घर आकर उसने अपनी मां से कहा पता है ना मैं बड़ा होकर क्या बनना चाहता हूं क्या बनना है आपको बड़े होकर।? अच्छा बताओ बड़े होकर क्या बनना चाहते हो ऐसे नहीं मामा मैं आपको हिंट देता हूं
पढ़ना लिखना सबको सिखाऊं
ज्ञान का प्रकाश फैलाऊ
जो भी मेरे पास है आता जीवन की सही राह को पाता
बताओ बच्चों अब रोहन क्या बनना चाहता है ?बिल्कुल सही टीचर। उनकी मम्मी ने कहा अच्छा तो अब तुम टीचर बनना चाहते हो बेटा।ऐसी आप ना तो पायलट बन पाएंगे ना टीचर बन पाएंगे ।आप तो गंगू की तरह काम कर रहे हो। मां कौन गंगू मा ने कहा तुम्हारा हाल भी गंगू के जैसा ही है। बताओ तो मम्मा गंगू कौन है? बेटा वह गंगू एक किसान है जिसने अपने खेतों के लिए कुआं खोदना था ।और सही जमीन को सेलेक्ट नहीं कर पाया तो ना जाने उसने अपने खेत में कितने गड्ढे कर दिए । रोहन ने कहा मम्मी ठीक से बताओ। तब उसकी मां ने कहा गंगू किसान के खेत के पास कोई कुआं नहीं था ।उसे अपने खेतों को सीखने के लिए किसी दूसरे के कुए से पानी लाना पड़ता था ।तब उसने सोचा क्यों ना मैं भी अपने खेतों के पास कुआं खुदवा दूं तो उसने अपने खेत के पास कुआं खोदना चालू किया पहले उसने 5 फीट का गड्ढा खोदा लेकिन उसे पानी नहीं मिला फिर उसने थोड़ी दूर पर एक और खड्डा खोदना चालू किया वहां भी उसने 5 फुट तक खड्डे खोद डाला लेकिन फिर भी उसे पानी नहीं मिला फिर वह दूसरे दिन खेतों पर जा कर एक नई जगह पर जमीन में गड्ढा खोदना चालू किया। ऐसा करके गंगू किसान ने अपने खेत में 7-8 गड्ढे खोद डाले। फिर वह हार कर अपने सिर पर हाथ रखकर बैठ गया तभी गंगू किसान के चाचा जी खेत पर पहुंचे और उन्होंने देखा कि खेत जगह-जगह खुदा हुआ है और गंगू उदास एक जगह बैठा हुआ है तब चाचा जी ने पूछा गंगू यह क्या किया है इतने सारी खड्डे क्यों खोद रहे हो? गंगू ने कहा मैं खेतों की सिंचाई के लिए पानी निकालने के लिए कुआं खोद रहा हूं पर देखो एक भी खड्डे में से पानी नहीं आ रहा चाचा जी ने कहा अगर तुमने सही जमीन का चुनाव करके एक ही जगह मेहनत की होती तो तुम को पानी मिल जाता ।गंगू ने कहा मैंने तो कितने सारे खड्डे खोदे हैं मैंने कितनी मेहनत तो की है फिर भी पानी नहीं आया।चाचा जी ने कहा तुमने मेहनत तो अलग-अलग खड्डे खोदने की की है वही मेहनत एक ही जगह गड्ढे को खोजने में लगाते तो पानी आ जाता। चाचा जी ने कहा खेत के किनारे खड्डा खोदना कुए के लिए सही जगह है ।तुम अब इस किनारे वाले खड्डे को खोदना चालू करो फिर से। गंगू ने अपने चाचा जी से कहा अच्छा चाचा जी ठीक है मैं इस किनारे वाले खड्डे को खोदना चालू करता हूं। गंगू ने 5 फीट और खड्डा खोदा यानी अब 10 फुट की गहराई में उसे खोद डाला लेकिन फिर भी पानी नहीं आया। तो चाचा जी से कहा 10 फुट खोद दिया अभी पानी नहीं आया है चाचा जी ने कहा आज के लिए इतना काफी है कल फिर आना सवेरे जल्दी और 10 फुट गहरा खड्डा और इसी खड्डे को करना। कितने फुट गहरा खोदने के लिए चाचा जी ने कहा बिल्कुल सही 20 फुट
चाचा जी ने कहा कि जमीन के अंदर से 20 से 30 फुट की गहराई तक के खड्डे खोदने पर पानी आता है। अगले दिन फिर से उसने वही किनारे वाले खड्डे को 25 फुट तक हॉट डाला की मेहनत रंग लाई और जमीन से पानी निकल आया तब माँ ने रोहन से कहा तुम भी तो पहले गंगू जैसे ही कर रहे हो कभी कुछ बनना है कभी कुछ बनना है तुम्हें दूसरों के नहीं बल्कि अपने हिसाब से अपने जीवन के लक्ष्य को तय करना होगा और फिर उसी लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल करने के लिए मेहनत करनी होगी। सही दिशा में सब उगाने का अच्छा अब मैं समझ गया अब मैं अपना एक ही लक्ष्य बना लूंगा उसी में सफल होकर दिखाऊंगा।
तभी तो कहते हैं बच्चों कुछ भी चुनते समय सोचेंगे समझेंगे और करेंगे विचार तो मिलेगा सही रास्ता और मिलेंगे खुशियां अपार।
🙏धन्यवाद 🙏
🙏धन्यवाद 🙏

Very good 🙌🙌
ReplyDeleteabsolutely true
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